nandi pratima
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कुरनूल। भगवान शिव के प्रिय वाहन नंदी के बारे में तो आप अवश्य जानते होंगे। वे प्रत्येक शिव मंदिर में उनके साथ विराजमान होते हैं, क्योंकि भोलेनाथ के प्रति उनके हृदय में अपार भक्ति है। नंदी के बिना शिव परिवार अधूरा है। यूं तो हमें हर शिव ​मंदिर में नंदी के दर्शन होते हैं, परंतु एक मंदिर ऐसा है जो नंदी के चमत्कारों की वजह से जाना जाता है। कहते हैं कि यहां नंदी की प्रतिमा लगातार बढ़ रही है। इस मंदिर से जुड़ी विभिन्न रिपोर्टों में कहा गया है कि हर साल नंदी की प्रतिमा में वृद्धि होती जा रही है। इस कारण मंदिर के स्तंभ तक हटाने पड़े हैं।

यह उमा-महेश्वर का प्रसिद्ध मंदिर है जो आंध्र प्रदेश के कुरनूल जिले के यागंती में है। यहां हर साल अनेक लोग भगवान शिव एवं इन अनूठे नंदी के दर्शन करने आते हैं। पहले जब लोग मंदिर में परिक्रमा करते तो परिक्रमा पथ में काफी स्थान था। इसके बाद नंदी की बढ़ती प्रतिमा के कारण यह स्थान कम पड़ने लगा।

इस मंदिर से जुड़ी एक और मान्यता इसे दूसरे स्थानों से अलग बनाती है। कहते हैं कि यहां कौए नहीं आते। इसकी वजह एक शाप को बताया जाता है। श्रद्धालु कहते हैं कि इस प्राचीन मंदिर की स्थापना अगस्त्य ऋषि ने की थी। वे भगवान वेंकटेश्वर का मंदिर बनवाना चाहते थे। उन्होंने बहुत ही भक्ति भाव से निर्माण शुरू किया, परंतु स्थापना के दौरान प्रतिमा का अंगूठा टूट गया। इस वजह से मंदिर का कार्य रोक दिया गया।

इसके पश्चात ऋषि ने घोर तप किया। वहां शिवजी ने उन्हें दर्शन दिए। उन्होंने कहा कि यह स्थान कैलास के समान दिखता है, इसलिए ऋषि ने मंदिर बनाना शुरू किया। एक कथा यह भी प्रचलित है कि तप करते हुए ऋषि को कौओं ने परेशान किया तो उन्होंने शाप ​दे दिया था। इसलिए वे यहां नहीं आते। यहां पास ही दो गुफाएं हैं। एक गुफा में भगवान वेंकटेश्वर की वह प्रतिमा विराजमान है जो मंंदिर निर्माण के समय खंडित हुई थी। दूसरी गुफा में ऋषि अगस्त्य ने तप किया था। श्रद्धालुओं की यह भी मान्यता है कि नंदी की यह प्रतिमा बढ़ती रहेगी और जिस दिन वे प्रतिमा से बाहर सशरीर उपस्थित हो जाएंगे, कलियुग का अंत हो जाएगा। श्रद्धालु इस स्थान के प्रति विशेष आस्था रखते हैं।

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