सर्दी के मौसम में प्राय: हम एक कप़डे को कई-कई दिनों तक पहन लेते हैं। खासकर अंदर के कप़डे तो काफी लोग बिना धोए कई दिनों तक पहनते रहते हैं, लेकिन यह सेहत के लिए काफी नुकसानदेह है। नमी वाले सर्दियों के मौसम में सबसे ब़डी दिक्कत आती है ठंडे पानी में रोजमर्रा के काम करने और कप़डे धोने-सुखाने में। क़डाके की ठंड में नहाना और कप़डे धोना भी किसी चुनौती से कम नहीं होता, क्योंकि धुले कप़डे जब दो-दो दिन तक सूखने का नाम नहीं लेते तो कई बार साफ-सुथरे कप़डे पहनना मुश्किल हो जाता है, लेकिन गंदे कप़डों में पाए जाने वाले बैक्टीरिया या जीवाणुओं से हमें स्किन-एलर्जी और इंफेक्शन हो सकते हैं, यहां तक कि बीमारियां होने से हमारी प्रतिरक्षा प्रणाली भी ग़डब़डा सकती है।आमतौर पर माना जाता है कि हमारे कप़डे पसीने की दुर्गंध से, धूल-मिट्टी लगने या किसी तरह के दाग से गंदे होते हैं। ऐसा गर्मियों में ज्यादा होता है और हमें नियमित रूप से कप़डे बदलने प़डते हैं। बेशक गर्मियों के बजाय सर्दियों में हमें पसीना न के बराबर आता है, लेकिन हमारे काम-काज के दौरान घर में या बाहर पर्यावरण में मौजूद धूल-मिट्टी के कण और जर्म्स हमारे कप़डों पर चिपक ही जाते हैं, जो हमारे शरीर की गर्मी पाकर विकसित हो जाते हैं और बीमारियों का कारण बनते हैं। वैज्ञानिक आंक़डों के मुताबिक हमारे वस्त्रों पर मिलने वाले लगभग ६६ प्रतिशत जर्म्स बाहर के पर्यावरण से आते हैं।द्भष्ठ ·र्ैंझ्ठ्ठणक्कष्ठ ब्ह्त्रष्ठ ब्स्र ृ्यथ्·र्ैं ख्ैंख्रष्ठकप़डों पर गौर करें तो सर्दियों में हालांकि स्वेटर, जैकेट, गर्म सूट, जींस जैसे मोटे और ऊनी कप़डे अधिक पहने जाते हैं, जो हमारे शरीर के तापमान को नियंत्रित रखने में सहयोग देते हैं। रोजाना इन्हें धोया नहीं जाता, लेकिन इन्हें ज्यादा से ज्यादा दो से तीन बार पहनना ही उपयुक्त है। नेशनल हेल्थ सर्विस के मुताबिक, बिना धोए कप़डे पहनना जोखिम भरा है। बैक्टीरिया के प्रसार से खुजली, जलन, रैशेज जैसी समस्याएं, यहां तक कि स्किन कैंसर होने का डर बना रहता है। इसलिए बेहतर है कि इन्हें पहनने के बाद अच्छी तरह झाडू कर हवा में सुखाएं या धूप जरूर लगवाएं। इन गर्म कप़डों के नीचे पहने जाने वाले शर्ट, टी-शर्ट जैसे सूती कप़डों को तो रोज धोकर ही पहनना चाहिए। हालांकि इनसे पसीने की दुर्गध नहीं आती, लेकिन शरीर की गर्मी से ये प्रभावित तो होते ही हैं। सर्दी के मौसम में त्वचा की नमी बनाए रखने के लिए हम अक्सर तेल की मालिश भी करते हैं, जो हमारे कप़डों पर भी लग जाता है और दाग प़ड जाते हैं। ऐसे दाग वाले कप़डे देखने में तो बुरे लगते ही हैं, इनसे आने वाली गंध भी कई बार नागवार होती है।जहां तक सर्दियों में पहने जाने वाले जुराबें, दस्ताने, मफलर और कैप का सवाल है-व्यक्तिगत स्वच्छता के लिहाज से इन्हें हमेशा धोकर ही पहनना चाहिए। लाख सफाई रखने के बावजूद इनमें मृत त्वचा कोशिकाओं, योनी स्रव, मल बैक्टीरिया और शरीर की गंध आनी शुरू हो ही जाती है। ऐसे में इन्हें दुबारा पहनना संभव नहीं हो पाता। इसलिए इन्हें दुबारा पहनना अपने स्वास्थ्य से खिलवा़ड करने जैसा ही है। हमारे शरीर के गुप्त अंगों की त्वचा बहुत संवेदनशील होती है। इसलिए ऐसे कप़डे हमेशा साफ और धुले ही पहनने चाहिए। इनमें बैक्टीरिया या सूक्ष्मजीव पाए जाते हैं, जिनसे फंगल इंफेक्शन होने और गंध बनने की आशंका रहती है। इनसे त्वचा में जलन, खुजली, रैशेज, फो़डे-फुंसी जैसी समस्याएं हो जाती हैं।

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