इसे विडंबना ही कहेंगे कि देश में ब़डे पैमाने पर मोटापे से ग्रस्त बच्चों की संख्या ब़ढती जा रही है, वहीं कुपोषण से ग्रस्त बच्चों की संख्या भी ब़ढत पर है। मोटापा कालांतर में कई रोगों को बुलावा देता है। अपने देश में आपको तमाम ऐसे लोग मिल जाएंगे, जो किसी मोटे बच्चे को देखकर यह कहते हैं… अरे यह मोटापे से ग्रस्त कहां है? यह तो खाते-पीते संपन्न परिवार का बच्चा है।यह कहना है मुंबई स्थित कोकिला बेन हॉस्पिटल की डॉ. अर्चना जुनैजा का। उनके अनुसार इस तरह की सोच वाले लोग बच्चों में मोटापे की समस्या की गंभीरता को समझते नहीं हैं। अगर बच्चों में मोटापे की समस्या को समय रहते नियंत्रित नहीं किया जाता है, तो कालांतर में वे मधुमेह (डाइबिटीज), हृदय रोग, हाई ब्लडप्रेशर और अर्थराइटिस आदि कई गंभीर रोगों से ग्रस्त हो सकते हैं। इस संदर्भ में सवाल यह उठता है कि बच्चों में ब़ढते मोटापे के कारण क्या हैं? इस क्रम में नानावती हॉस्पिटल, मुंबई के सीनियर पीड्रियाटीशियन डॉ. हिरेन दोसी का कहना है कि अस्वास्थ्यकर जीवन-शैली के कारण मोटापे की समस्या ब़ढ रही है।अस्वास्थ्यकर जीवन-शैली पर अमल करने के लिए बच्चे कम, किंतु उनके अभिभावक ज्यादा जिम्मेदार हैं। आज की आपाधापी भरी जिंदगी में समय नहीं मिलता, यह कहकर अपनी जिम्मेदारियों से पीछा छु़डा लेते हैं। इन दिनों फास्ड फूड्स के नाम पर चिकनाइयुक्त हाई कैलोरी फूड्स सहजता से उपलब्ध है, जो मोटापा को ब़ढाने में सहायक है। डॉ. अर्चना जुनैजा कहती हैं कि बच्चों में मोटापा बढने का एक प्रमुख कारण खेलकूद, व्यायाम और अन्य शारीरिक गतिविधियों में कम से कम संलिप्त होना है। टेलीविजन, मोबाइल फोन और कंप्यूटर के लिए ज्यादा से ज्यादा वक्त निकालना है। डॉ. जुनैजा के अनुसार मोटापे का प्रमुख कारण यही है। इसका आशय यह है कि विभिन्न खाद्य पर्दार्थों से जो ऊर्जा या कैलोरी हम ग्रहण करते हैं, उसे अगर अगर खेलकूद, व्यायाम, डांस आदि में बर्न नहीं करेंगे, तो यही अतिरिक्त ऊर्जा बच्चों या वयस्कों के शरीर में संचित होकर मोटापे को ब़ढाने में सहायक होगी। वैसे भी इन दिनों बच्चे आउटडोर गेम्स या शारीरिक गतिविधियों से दूर होते जा रहे हैं। इसी तरह डॉ. हिरेन दोसी कहते हैं कि बच्चों को टेलीविजन के सामने बैठकर खाना नहीं खाना चाहिए। कारण, ऐसी स्थिति में वे भूख से ज्यादा खाना खा लेते हैं और इसका अहसास उन्हें टेलीविजन से हटने का बाद होता है। कुछ बच्चों में जेनेटिक कारणों से भी मोटापा ब़ढ सकता है। अगर अभिभावक ओवरवेट हैं, तो उनके बच्चे भी कालांतर में मोटापे से ग्रस्त हो सकते हैं।मेदांता दि मेडिसिटी, गु़डगांव की चीफ न्यूट्रीशियन डॉ. शुभदा भनौत कहती हैं कि डोंट यूज फूड्स फॉर रिवाड्र्स। इसका आशय यह है कि पैरेंट्स को फूड्स को बच्चे को पुरस्कृत करने या फिर प्यार जताने के तौर पर इस्तेमाल नहीं करना चाहिए। जैसे, अगर तुम मंथली टेस्ट में अच्छे नंबर लाओगे, तो फलां रेस्त्रां में बैठकर तुम्हें पसंदीदा पिज्जा खिलाया जाएगा। बच्चे के साथ आप क्वालिटी टाइम दें। उसे टाइम बिताने के लिए पिज्जा न खिलाएं।डॉ. शुभदा भनौत के अनुसार सामान्य धारणा यह है कि आवश्यकता से अधिक कैलोरी का सेवन फास्ट फूड्स, वसा और शर्करा (शुगर) में उपलब्ध कैलोरीज के माध्यम से होता है परन्तु इसके साथ ही स्वस्थ खाद्य पर्दार्थों का भी आवश्यकता से अधिक सेवन करने से मोटापा हो सकता है। ऐसा इसलिए क्योंकि अत्यधिक कैलोरी शरीर में वसा के रूप में ही संचित होती है।बहरहाल, सबसे महत्वपूर्ण सवाल यह है बच्चों में मोटापे पर नियंत्रण कैसे किया जाए। इस संदर्भ में नानावती हॉस्पिटल, मुंबई के सीनियर बाल रोग विशेषज्ञ हिरेन दोसी और शुभदा भनौत के सुझाव गौरतलब है, खान-पान के मामले में अभिभावकों को बच्चों का रोल मॉडल बनना चाहिए।किसी व्यक्ति की लंबाई से वजन का अनुपात बॉडी मास इंडेक्स (बीएमआई) की मदद से निकाला जाता है। इससे वजन की अलग-अलग श्रेणियों का पता चलता है। जैसे (सामान्य वजन, मोटापा या सामान्य से कम वजन)। बीएमआई शरीर में वसा से संबंधित है, लेकिन यह वसा का एकमात्र माप नहीं है। २ वर्ष से कम उम्र के बच्चों के लिए बीएमआई की जगह विकास चार्ट का उपयोग किया जाता है।८ बच्चे को कम से कम एक घंटा व्यायाम और शारीरिक श्रम करना चाहिए।८ अभिभावक अपने बच्चों को सेलफोन और कंप्यूटर का २ घंटे से ज्यादा इस्तेमाल करने की इजाजत न दें।८ अनेक बच्चे थायरॉइड की समस्या के कारण मोटापे से ग्रस्त हो जाते हैं। इस समस्या को दूर करने के लिए दवाएं दी जाती हैं।८ शिशु के जीवन के पहले वर्ष में स्तनपान अवश्य कराएं। स्तनपान कराने सेे बचपन और किशोरावस्था में मोटापे का खतरा कम करता है।८ बच्चों को सब्जियां, फल, साबुत अनाज, कम चिकनाई वाला दूध और उससे बने पदार्थ खाने के लिए प्रोत्साहित करें।८ बच्चों के पसंदीदा व्यंजनों को स्वास्थ्यकर बनाने की कोशिश करें। पसंदीदा व्यंजनों में कुछ परिवर्तन करके उन्हें स्वास्थ्यकर और स्वादिष्ट बनाया जा सकता है जैसे व्हीट (गेहूं) के बेस का कम चिकनाई वाला पिज्जा, कोल्ड ड्रिंक्स की जगह फ्रूट शेक्स और मिठाई के स्थान पर मीठों फलों को खाना चाहिए।८ बर्गर में आलू की तली हुई टिक्की के बजाय सोयाबीन और पनीर की एयर फ्राइड टिक्की का इस्तेमाल करना चाहिए।

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