हाल में हुए एक शोध के मुताबिक, कसरत दिल से संबंधित बीमारियों में किसी दवा की तरह ही कारगर होता है। ब्रिटिश मेडिकल जर्नल में प्रकाशित एक अध्ययन के दौरान करीब तीन लाख चालीस हजार मरीजों पर सैंक़डों प्रयोग किए गए। इन प्रयोगों में यह देखा गया कि कसरत और दवाओं का बीमारियों पर कितना असर होता है। इस दौरान यह पाया गया कि दिल से संबंधित बीमारी में कसरत दवाओं से ज्यादा कारगर है।इस शोध अध्ययन से जु़डे चिकित्सकों का मानना है कि दिल से संबंधित बीमारियों का इलाज करने वाले चिकित्सकों को अपने मरीजों के लिए शारीरिक अभ्यास को नुस्खे के तौर पर आजमाना चाहिए। हालांकि शोध से जु़डे चिकित्सकों ने कहा कि इसका मतलब यह नहीं है कि मरीजों को दवा के बदले शारीरिक अभ्यास को महत्व देना चाहिए। चिकित्सकों का सुझाव है कि दोनों तरीकों को एक साथ अपनाने पर जोर देना चाहिए। हालांकि, दुनिया भर में आम लोगों के बीच शारीरिक अभ्यास का चलन कम हो रहा है। इंग्लैंड में तो कामकाजी जिंदगी इतनी आपाधापी वाली है कि महज एक तिहाई लोग ही सप्ताह में २ घंटे शारीरिक अभ्यास कर पाते हैं।वहीं दूसरी ओर, इंग्लैंड में प्रति मरीज दवाओं का इस्तेमाल ब़ढा है। वर्ष २०१० के आंक़डों के मुताबिक, प्रत्येक मरीज औसतन १७ से ज्यादा दवाओं का इस्तेमाल कर रहा है। जबकि वर्ष २००० में यह आंक़डा प्रति मरीज ११ दवाओं का ही था। दिल का दौरा प़डने से हर साल लाखों लोगों की मौत होती है। इस शोध के दौरान लंदन स्कूल ऑफ इकोनॉमिक्स, हार्वर्ड मेडिकल स्कूल का पिलग्रिथ हेल्थ केयर इंस्टीट्यूट और स्टेनफोर्ड यूनिवर्सिटी स्कूल ऑफ मेडिसीन के शोधकर्ताओं ने विशद चिकित्सीय शोध रिपोर्टों का अध्ययन भी किया ताकि कसरत और दवाओं का बीमारी पर प़डने वाले असर को रेखांकित किया जा सके।

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