सामान्य खांसी, धसके वाली खांसी, काली खांसी और दमे से होने वाली खांसी।क्वय्ैंफ्र्‍ ·र्ष्ठैं ·र्ैंय्द्यह्लय्श्र दमा, गले में इंफेक्शन, टॉन्सिलाइटिस, फेरनजाइटिस, ब्रोंकाइटिस, फेफ़डों का इंफेक्शन, निमोनिया, हृदयरोग आदि कारणों से खांसी हो सकती है।श्र बहुत बार ऐसा देखा जाता है की एसिडिटी भी खांसी का कारण होती है क्योंकि पेट में जो एसिड बनता है वह ऊपर च़ढकर सांस की नली में पंहुच जाता है। ऐसी स्थिति में एसिड का उपचार अवश्यक है, न कि खांसी का।श्र दिल का बायां हिस्सा ब़डा हो जाए अथवा फेफ़डों की नसों का प्रेशर अधिक हो तो भी खांसी होने लगती है। इसे हार्ट का अस्थमा कहा जाता है।क्वय्ैंफ्र्‍ ·र्ैंय् झ्श्नय्·र्ल्ैं्यत्र·र्ैं झ्ख्रय्त्र्ह्न फ्ष्ठ ंध्य्ज्ी काली मिर्च और शक्कर को बराबर मात्रा में पीस कर गाय के दूध से बनें शुद्ध घी में इस मिश्रण को अच्छी तरह मिलाकर गोलियां बना लें। दिन में कम से कम तीन बार एक एक गोली चूसें ।ी सूखी खांसी में २ ग्राम हल्दी पाउडर में एक चम्मच शहद मिलाकर चाट लें । दिन में दो बार खाएं।ी नींबू का रस ५० मिलि, शहद २०० ग्राम , अदरक रस २० ग्राम और ५० मिलि गरम पानी एक सार मिला कर किसी बोतल में भर लें। २-२ चम्मच दिन में ३-४ बार लें।ी काली मिर्च को शक्कर के साथ खूब चबाकर खाएं।ी आम को भोभर में भून लें। इस प्रकार भुना हुआ आम दिन में तीन बार खाएं।ी अदरक के छोटे से टुक़डे पर नमक लगाकर चूसें।ी हींग, काली मिर्च और नागरमोथा को पीसकर गु़ड के साथ मिलाकर गोलियां बना लें। प्रतिदिन भोजन के बाद दो गोलियों का सेवन करें।ी काली मिर्च, हऱडे का चूर्ण, अडूसा तथा पिप्पली का का़ढा दिन में दो बार पिएं।ी सोंठ चूर्ण के साथ मुलहटी का चूर्ण एक चम्मच गुनगुने पानी में लेने पर छाती में जमा कफ बाहर निकलता है और खांसी में आराम मिलता है।ी नीम के फूलों का सेवन करने से कफ नष्ट होता है।

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