आज हर किसी की दिनचर्या काफी व्यस्त हो गई है। शहरों में रहने वाले लोग तो इतने व्यस्त हैं कि उन्हें यह भी पता नहीं चलता कि कब किस बीमारी ने आ घेरा। व्यस्त दिनचर्या के कारण होने वाली बीमारियों में प्रमुख है गर्दन का दर्द। यह समस्या क्या है और आप इससे कैसे बच सकते हैं, बता रही हैं अमृता प्रकाश गर्दन का काम न सिर्फ हमारे शरीर के सबसे महत्वपूर्ण अंग सिर को सहारा देना है, बल्कि इसका लचीलापन भी हमारे लिए बहुत जरूरी है। जब गर्दन में दर्द होता है तो हमारे लिए चिंता का विषय बन जाता है। हमारी पूरी दिनचर्या बुरी तरह प्रभावित हो जाती है।€द्भह्र ब्ह्त्रय् ब्स् द्भब् ख्रख्रश्चआज की जीवनशैली भी इस बीमारी का एक प्रमुख कारण है। लंबे समय तक ऑफिस या घर में कंप्यूटर पर काम करना, इसका एक सबसे ब़डा कारण साबित हो रहा है। इसके अलावा ऐसे तकिए का इस्तेमाल करना, जो ज्यादा ऊंचा या बहुत नीचा हो, भी गर्दन में दर्द का कारण बन सकता है। चिंता से भी गर्दन दर्द हो सकता है और फोन पर काफी देर तक गर्दन एक तरफ झुका कर बात करने से भी। लंबी दूरी तक खराब स़डक पर दोपहिया वाहन चलाना भी आपकी गर्दन के लिए तकलीफदेह साबित हो सकता है और स्टाइलिश कुर्सी और सोफे का अत्यधिक इस्तेमाल भी। आप शराब और तंबाकू का अत्यधिक सेवन करते हैं तो भी इस तकलीफ से पीि़डत हो सकते हैं और ब़ढते मोटापे से भी।ख्ख्रश्चद्म ·र्ष्ठैं ख्रख्रश्च ·र्ैंय् डर्प्चैंझ्गर्दन की हड्डी, जो री़ढ की हड्डी का ही हिस्सा है, में सात वर्टिब्रा होती हैं। इनके बीच सर्वाइकल डिस्क दो वर्टिब्रा को जो़डने का कार्य करती है। इस कारण हम अपनी गर्दन को हर तरफ घुमा पाते हैं। लगातार बहुत अधिक असामान्य दबाव प़डने पर डिस्क का क्षरण होने लगता है और डिस्क के मध्य में स्थित जेली जैसा मुलायम भाग उसके बाहरी कवच से हर्निया की भांति बाहर निकल आता है। इस कारण स्पाइनल कॉर्ड तंत्रिकाओं को दबाने लगता है। इसी वजह से गर्दन, कंधों और बांहों में दर्द, बांहों में कमजोरी, चक्कर आना और गर्दन घुमाने में दर्द जैसी समस्याएं उत्पन्न हो जाती हैं।ंफ्·र्ष्ठैं फ्य्द्बय़्द्भ ध्ूय्ह्लय्३लंबे समय से कमर या गर्दन में दर्द।३सुबह के वक्त या लंबे आराम के बाद गर्दन और कमर में जक़डन और असहनीय पी़डा होना।३गर्दन दर्द का प्रभाव कई बार कंधे और हाथों में झनझनाहट की तरह महसूस होता है।३मानसिक कारणों खासकर तनाव से दर्द में इजाफा होता है।ज्य्ैंघ् फ्ष्ठ ज्य्द्म·र्ैंय्यद्यद्भय्ैं३एक्स रे, सी टी स्कैन व एमआरआई द्वारा खराब डिस्क की वास्तविक स्थिति और दब रहे स्पाइनल कॉर्ड और नसों की सही जानकारी मिल जाती है।€द्भय् ब्स् ंध्य्ज्३नियमित शारीरिक व्यायाम और संतुलित पौष्टिक भोजन करें, जो इस रोग से बचाव का एक प्रमुख उपाय है।३विशेषज्ञ की देखरेख में सही तरीके से सोने, उठने, बैठने और भार उठाने की विधियां जाननी चाहिए।३सर्वाइकल कॉलर और लम्बोसेकरल बेल्ट के इस्तेमाल से भी इस बीमारी से राहत मिलती है।३टेलीफोन की जगह हेड फोन या स्पीकर फोन का इस्तेमाल करें। टेलीफोन का इस्तेमाल करें तो गर्दन सीधी रखकर बात करें।३सोते समय सही पोश्चर का ध्यान रखें।

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