कटहल का वानस्पतिक नाम आर्टोकार्पस हेटेरोफिल्लस है। इसके फलों में कई महत्वपूर्ण कार्बोहाइड्रेट के अलावा कई विटामिन भी पाए जाते हैं। सब्जी के तौर पर खाने के अलावा कटहल का अचार और पाप़ड भी बनाया जाता है। आदिवासी अंचलों में कटहल का उपयोग अनेक रोगों के इलाज में किया जाता है। कुछ ऐसे ही चुनिंदा हर्बल नुस्खों के बारे में जानें…ृत्फ्द्य द्बष्ठ्र ब्स् द्धष्ठब्त्रद्यर्‍द्म ख्रप्य्कटहल की पत्तियों की राख अल्सर के इलाज के लिए बहुत उपयोगी होती है। हरी ताजा पत्तियों को साफ धोकर सुखा लें। सूखने के बाद पत्तियों का चूर्ण तैयार करें। पेट के अल्सर से ग्रस्त व्यक्ति को इस चूर्ण को खिलाएं। अल्सर में बहुत जल्दी आराम मिलेगा।द्बरुैंब् ·द्द च्णय्ध्ह्र द्बष्ठ्र ृफ्द्यख्रय्द्यजिन लोगों को मुंह में बार-बार छाले होने की शिकायत हो, उन्हें कटहल की कच्ची पत्तियों को चबाकर थूकना चाहिए। आदिवासी हर्बल जानकारों के अनुसार, यह छालों को ठीक कर देता है।क्वय्द्मय् ज्त्ख्रर्‍ झ्घ्य् ख्रष्ठत्रय् ब्स्पके हुए कटहल के गूदे को अच्छी तरह से मैश करके पानी में उबाल लें। इस मिश्रण को ठंडा कर एक गिलास पीने से जबरदस्त स्फूर्ति आती है। यही मिश्रण यदि अपच के शिकार रोगी को दिया जाए तो उसे फायदा मिलता है।ठ्ठणय्द्भ्यद्धट्टर्‍ज् द्बष्ठ्र ध्य्द्नख्रय्द्भ·र्ैंगुजरात के आदिवासी कटहल की पत्तियों के रस का सेवन करने की सलाह डायबिटीज के रोगियों को देते हैं। यही रस हाई ब्लडप्रेशर के रोगियों के लिए भी उत्तम है।ज्ह्ठ्ठणक्कह्र ·द्द ख्रख्रश्च द्बष्ठ्र द्यय्द्बद्धय्ह्लय्फल के छिलकों से निकलने वाला दूध यदि गांठनुमा सूजन, घाव और कटे-़फटे अंगों पर लगाया जाए तो आराम मिलता है। इसी दूध से जो़डों पर मालिश की जाए तो जो़डों के दर्द में आराम मिलता है।ख्ध्ष्ठ ·द्द द्यह्ख्ह्र ·र्ैंह् ्यद्बट्टय् ख्रष्ठत्रय् ब्स्कटहल के पे़ड की ताजी कोमल पत्तियों को कूट कर छोटी-छोटी गोली बना लें। इससे गले के रोगों में फायदा होता है।·र्ैंŽज् ·र्ैंह् क्वह्वद्ब ·र्ैंद्यत्रय् ब्स्आदिवासियों के अनुसार, पके फलों का ज्यादा सेवन करने से पेट साफ होता है। साथ ही, अपच की समस्या का निवारण हो जाता है।

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