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पटना/वार्ता। बिहार के उप मुख्यमंत्री सुशील कुमार मोदी ने अत्यंत गरीब परिवार में जन्मे राष्ट्रीय जनता दल (राजद) के अध्यक्ष लालू प्रसाद यादव के उनके राजनीतिक जीवन में नायाब तरीके से अकूत सम्पत्ति अर्जित करने का खुलासा अपनी पुस्तक ‘लालू-लीला’ में किया है। लोकनायक जयप्रकाश नारायण की जयंती के अवसर पर गुरुवार को यहां आयोजित समारोह में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के वरिष्ठ नेता एवं उप मुख्यमंत्री मोदी द्वारा लिखित पुस्तक लालू-लीला का लोकार्पण किया गया।

तीन सौ पृष्ठ की इस पुस्तक में कहा गया है कि राजद अध्यक्ष यादव का जन्म अत्यंत गरीब परिवार में हुआ था और वह अपने माता-पिता एवं चपरासी भाई की गरीबी का बखान कर लोगों की तालियां बटोरते थे। लेकिन, सत्ता में आने के चंद वर्षों में गरीबों के मसीहा बनने वाले यादव अकूत सम्पत्ति के मालिक बन गए। मोदी ने पुस्तक में लिखे गए तथ्यों का जिक्र करते हुए कहा कि चारा घोटोले के चार मामलों में सजायाफ्ता यादव के लिए राजनीति एवं सत्ता धन अर्जित करने का जरिया बन गई।

यादव परिवार की भ्रष्टाचार से अर्जित अकूत बेनामी सम्पत्ति की पड़ताल आसान नहीं थी। शुरुआती दौर में मिट्टी घोटाला सामने आया और इसी घोटाले से रेलवे टेंडर घोटाला के जरिये पटना की बेशकीमती साढ़े तीन एक़ड जमीन पर बन रहे बिहार के सबसे बडे मॉल का पर्दाफाश हुआ। मॉल की जांच से खोखा कम्पनियां उजागर होती चली गई। उप मुख्यमंत्री ने कहा कि इसी क्रम में दान, वसीयत, लीज एवं पावर ऑफ एटॉर्नी के माध्यम से सम्पत्ति हथियाने का पता चला।

यादव अपनी पार्टी के विधायक, विधान पार्षद्, सांसद और मंत्री बनाने के एवज में जहां रघुनाथ झा एवं श्रीमती कांति सिंह जैसे कई नेताओं से जमीन-मकान दान में लिखवा लिए। वहीं, भ्रष्टाचार से कमाए काले धन को सफेद करने के लिए गरीबी रेखा से नीचे (बीपीएल) के ललन चौधरी, रेलव के खलासी हृदयानंद चौधरी तथा भूमिहीन प्रभुनाथ यादव, चन्द्रकांता देवी, सुभाष चौधरी तक से नौकरी, ठेका या फिर अन्य तरीके से लाभ पहुंचाने के एवज में कीमती जमीन-मकान दान के जरिये हासिल कर ली।

मोदी ने कहा कि यादव ने अपने रिश्तेदारों को भी बेनामी सम्पत्ति हासिल करने का माध्यम बनाया। अपने भाई के समधी, अपने ससुराल, बेटी के ससुराल के रिश्तेदारों के नाम से पहले अपने काले धन से जमीन-मकान खरीदी। बाद में पत्नी, बेटों एवं बेटियों के नाम पर गिफ्ट करवा लिया। ऐसे करीब बारह मामले उजागर हुए हैं जिनमें यादव ने करोड़ों रुपए की सम्पत्ति कौड़ियों के दाम पर राजनेताओं अपने कारिदों या रिश्तेदारों से दान करवा लिया। गिफ्ट के अलावा वसीयत एवं पावर ऑफ एटॉर्नी के माध्यम से भी सम्पत्ति लिखवाने का नया फार्मूला इजाद किया।

उप मुख्यमंत्री ने कहा कि यादव ने सम्पत्ति हथियाने में छह से ज्यादा मुखौटा कंपनियों का इस्तेमाल करने में रॉबर्ट वाड्रा को भी मात दे दी। इन सभी मुखौटा कंपनियों के माध्यम से सम्पत्ति हथियाने का एक ही तरीका अपनाया गया कि किसी बंद पड़ी कम्पनी में काला धन निवेश कर कम्पनी के नाम जमीन-सम्पत्ति खरीदना फिर उस कम्पनी के पुराने निदेशक को हटाकर अपने परिवार के लोगों को उस पद पर बैठा देना। इसी तकनीक का इस्तेमाल कर डिलाइट मार्केटिंग की साढ़े तीन एकड़ जमीन के मालिक बन गए, जिस पर उनके पुत्र तेजस्वी प्रसाद यादव का 500 करोड़ रुपए का पटना में बिहार का सबसे बड़ा मॉल बन रहा था।

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