rakesh asthana cbi
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नई दिल्ली। केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) ने अपने दूसरे नंबर के शीर्ष अधिकारी राकेश अस्थाना के खिलाफ मामला दर्ज किया है। अस्थाना पर आरोप लगाया गया है कि कारोबारी मोईन कुरैशी से जुड़े जिस मामले की वे जांच कर रहे थे, उसके एक आरोपी से उन्होंने रिश्वत ली है। राकेश अस्थाना सीबीआई के विशेष निदेशक हैं। उनके खिलाफ सतीश सना की शिकायत के आधार पर 15 अक्टूबर को एफआईआर दर्ज हुई है।

बता दें कि कारोबारी मोईन कुरैशी से जुड़े 2017 के एक मामले में सतीश सना जांच का सामना कर रहा है। उसने आरोप लगाया है कि क्लीन चिट दिलाने में अस्थाना ने मदद की थी। इसके बाद यह मामला सुर्खियों में आ गया। सतीश सना हैदराबाद का कारोबारी है। राकेश अस्थाना के खिलाफ दर्ज एफआईआर में दावा किया है कि उसने अस्थाना को 3 करोड़ रुपए दिए थे। गौरतलब है कि दो महीने पहले राकेश अस्थाना ने भी कैबिनेट सचिव से सीबीआई निदेशक आलोक वर्मा के खिलाफ यह शिकायत की थी।

सतीश सना के खिलाफ राकेश अस्थाना के नेतृत्व में एसआईटी जांच कर रही थी। आरोप है कि उसने मोईन कुरैशी से 50 लाख रुपए लिए थे। यही नहीं, उसने यह भी दावा किया कि दुबई निवासी एक बैंकर मनोज प्रसाद ने उसे कहा था कि सीबाआई से उसके ​अच्छे रिश्ते है। उसने यह कहा कि उसका भाई सोमेश ऐसे मामले से बाहर निकलवा देगा।

सतीश सना का कहना है कि वह पिछले करीब दस वर्षों से मनोज प्रसाद को जानता है। सीबीआई 16 अक्टूबर को मनोज को गिरफ्तार कर चुकी है। सना ने दावा किया है कि एफआईआर दर्ज होने से एक दिन पूर्व मनोज ने नाम ​हटाने के लिए सीबीआई अधिकारी की ओर से 5 करोड़ रुपए की मांग की। उसने कहा कि 3 करोड़ रुपए अग्रिम और 2 करोड़ रुपए चार्जशीट दाखिल करते समय देने हैं, ताकि क्लीन चिट मिल जाए।

सतीश सना ने अपनी शिकायत में यह दावा किया कि सोमेश ने उससे कहा था कि राकेश अस्थाना उसके सीबीआई केस का ध्यान रखेंगे। वह दुबई में सोमेश से मिला तो उसने कहा कि राकेश अस्थाना निश्चित रूप से उसका काम करेंगे। सोमेश ने कहा कि वह अस्थाना के दुबई और लंदन में होने वाले निवेश का ध्यान रखता है। उसने यह तक दावा किया कि गत वर्ष अस्थाना लंदन आए तो उसके घर में ही ठहरे थे।

सतीश सना ने यह भी दावा किया कि उसने राकेश अस्थाना की तस्वीर सोमेश के वॉट्सअप पर देखी थी। सतीश ने यह कहकर हड़कंप मचा दिया कि उसने मनोज को एक करोड़ रुपए दुबई में दे दिए थे। वहीं राकेश अस्थाना ने सीवीसी को लिखे पत्र में कहा है कि सीबीआई निदेशक उन्हें फंसाना चाह रहे हैं। उन्होंने पत्र में कहा है कि सीबीआई निदेशक ने भ्रष्टाचार निरोधक शाखा में ऐसे अधिकारी की  नियुक्ति की जिसकी छवि बेदाग नहीं है और उसे नियमों का उल्लंघन करने वाले के तौर पर जाना जाता है।

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