चेन्नई। तमिलनाडु हिंदी अकादमी का वार्षिक हिन्दी समारोह रविवार को यहां पूझल स्थित जैन विद्याश्रम में संपन्न हुआ। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रुप में प्रो. राममोहन पाठक ने कहा कि सभी भारतीय भाषाएं बहिनें हैं, हिंदी सभी में ब़डी बहिन है। उन्हांेने कहा कि हमें हमारे जीवन व्यवहार में हिंदी और हिंदी के शब्दों के अधिकाधिक प्रयोग को वरीयता देनी चाहिए। विशिष्ट अतिथि प्रो.टीएसके कण्णन ने हिंदी सेवा के लिए समन्वय दृष्टि पर बल दिया। अध्यक्ष डॉ.एस चोरि़डया ने कहा कि हिंदी भारत की संपर्क भाषा है। कवि डॉ. दिलीप धींग के संयोजन में हुए इस कार्यक्रम में वरिष्ठ हिंदी प्रचारक पीआर विश्वनाथन को हिंदी प्रचार सम्मान और ई.बालमणि को शिक्षक सिंधु सम्मान से नवाजा गया। इन्हें माला पहनाकर, शॉल ओ़ढाकर, प्रशस्ति पत्र देकर व सम्मान राशि भेंट की गई। इस अवसर पर अतिथियों ने अकादमी के अंतर्गत हुए व्याख्यानों के संकलन की पुस्तक ‘वाग्मिता’’, डॉ.पीआर वासुदेवन ‘शेष’’ के लघुकथा संग्रह ‘प्रतिबिंब’’, डॉ.जमुना कृष्णराज के उपन्यास ‘मीना’’ व प्रो.एस रजनी के लघु शोधप्रबंध ‘वे दिन’’ उपन्यास से अस्तित्वबोध का विमोचन किया। दूसरे सत्र में हुई काव्यगोष्ठी में रचना तिवारी, प्रहलाद श्रीमाली, जया लक्ष्मी, पूजा पाराशर, जे.अशोककुमार जैन, एस.अनंतकृष्णन, ओमपाल शर्मा व तेजराज गहलोत ने काव्यपाठ किया। शशिलेन्द्रकुमार गुप्ता ने संचालन किया। रिसर्च फाउण्डेशन फॉर जैनोलोजी के साझे में हुए इस समारोह में अनेक लोग शामिल थे।

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