दक्षिण भारत न्यूज नेटवर्कनिपाणी। संतश्री ललितप्रभसागरजी ने कहा है कि घर की ताकत दौलत और शोहरत नहीं, प्रेम और मोहब्बत हुआ करती है। प्रेम बिना धन और यश व्यर्थ हैं। जिस घर में प्रेम है वहां धन और यश अपने आप आ जाता है। उन्होंने कहा कि जहां सास-बहू प्रेम से रहते हैं, भाई-भाई सुबह उठकर आपस में गले लगते हैं और बेटे ब़डे-बुजुर्गों को प्रणाम कर आशीर्वाद लेते हैं, वह घर धरती का जीता-जागता स्वर्ग होता है, वहीं दूसरी और भाइयों के बीच में कोर्ट केस चल रहे हैं, देराणी-जेठाणी, सास-बहू एक-दूसरे को देखना तक पसंद नहीं करती ऐसे घर साक्षात नरक के समान है। संतश्री शनिवार को निपाणी के गुरुवारपेठ स्थित ५२ जिनालय मंदिर के आराधना भवन में आयोजित प्रवचन कार्यक्रम के दौरान श्रद्धालुओं को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि अगर व्यक्ति संत नहीं बन सके तो उसे सद्गृहस्थ बनना चाहिएऔर घर को पहले स्वर्ग बनाने में अपनी प्रभावी भूमिका अदा करनी चाहिए। जो अपने घर-परिवार में प्रेम नहीं घोल पाता वह समाज में भी प्रेम रस नहीं घोल पाता है तथा जो अपने सगे भाई को ऊपर उठा न पाए उससे पारिवारिक व सामाजिक स्तर की किसी प्रकार की अपेक्षाएं व्यर्थ हैं। कार्यक्रम में मकान, घर और परिवार की नई व्याख्या देते हुए संतश्री ने कहा कि ईंट, चूने, पत्थर से मकान का निर्माण होता है, घर का नहीं। जहां केवल बीवी-बच्चे रहते हैं वह मकान घर है, जहां पर माता-पिता और भाई-बहन भी प्रेम और आदरभाव के साथ रहते हैं वही घर परिवार कहलाता है। घर को मंदिर बनाने की प्रेरणा देते हुए ललितप्रभजी ने कहा, घर का वातावरण ठीक नहीं होगा तो मंदिर जाने की याद आएगी, लेकिन यदि हमने ही घर का वातावरण अच्छा बना लिया तो हमारा घर-परिवार ही मंदिर-तीर्थ बन जाएगा। संतश्री ने कहा कि घर के प्रत्येक सदस्य को संकल्पित होना होगा कि वह कभी किसी का दिल नहीं दुखाएगा। उन्होंने कहा कि हमसे धर्म-कर्म हो तो अच्छी बात है, मगर ऐसा कोई काम तो कतई नहीं करना चाहिए जिससे कि घर नरक बन जाए। घर को स्वर्ग बनाने के लिए संतश्री ने कहा कि घर के सभी सदस्य एक-दूसरे के काम आने चाहिएं, यानी घर में प्रत्येक कार्य में सभी को अपनी-अपनी क्षमता के अनुसार योगदान की आहूति देनी चाहिए। संतश्री ने यह भी कहा कि घर को स्वर्ग बनाने के लिए घर के सभी सदस्य साथ में बैठकर खाना खाएं, एक-दूसरे के यहां जाएं, सुख-दुख में साथ निभाएं, स्वार्थ को आने न दें, भाई-भाई को आगे ब़ढाएं, सास-बहू जैसे शब्दों को हटा दें।

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