बेंगलरु/दक्षिण भारतयहां माधवनगर स्थित वासुपूज्य स्वामी जैन संघ के तत्वावधान में आचार्यश्री रत्नसेनसूरीश्वरजी ने रविवार को अपने प्रवचन में कहा कि समय के साथ समझ और समझ के साथ समय हमें प्राप्त नहीं होता है। उन्हांेने कहा कि दुनिया का हर व्यक्ति सुबह होते ही पैसे कमाने दौ़डने लगता है और पैसे कमाने का मुख्य उद्देश्य एक मात्र पांच इंद्रियों के विषय सुख को पाना है। उन्होंने कहा कि पैसे मिलते ही व्यक्ति सुंदर शब्द, रुप, रस, गंध और स्पर्श के सुखों को पाने में प्रयत्नशील हो जाता है। आचार्यश्री ने मय उदाहरण के कहा कि पैसों को प्राप्त करने के बाद जीवन में धर्म नहीं, बल्कि पाप ब़ढ जाता है। उन्होंने कहा कि समाज में भी धनी व्यक्ति को ज्यादा इज्जत दी जाती है, लेकिन वास्तविकता है कि धन पाने के लिए हिंसा, झूठ और चोरी के पाप अवश्य ही होते हैं। रत्नसेनजी ने कहा कि धन और स्वजन को छो़डकर जाना है, लेकिन यह भावना जीवन में आत्मसात करना अत्यंत ही कठिन है, क्योंकि समय के साथ समझ और समझ के साथ समय दुर्लभ है।

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