बेंगलूरु। पुष्पगिरि तीर्थ के प्रणेता आचार्यश्री पुष्पदंतसागरजी ने गुरुवार को चेन्नई की ओर विहार शुरु किया। इस अवसर पर बोम्मनहल्ली पहुंचे आचार्यश्री ने अपने उद्बोधन में कहा कि सम्यक दृष्टि के अभाव में एकता तथा प्रेम, प्रीति व स्नेह के बादल बरस नहीं सकते हैं । उन्होंने कहा कि परस्पर एक-दूसरे के संपर्क में आने के लिए समन्वय की नीति जरुरी है। उन्होंने कहा कि अनेकांत के सिद्धांत जैन धर्म के प्राण है और इसी दृष्टि ने दानव को मानव बनाया हैव मानव को देवेन्द्र के स्वर्ग सिंहासन पर भी बैठाया है। पुष्पदंतजी ने कहा कि अहिंसामय दृष्टि के कारण ही महात्मा गांधी ने देश को स्वतंत्र कराया और राष्ट्रपिता का सम्मान प्राप्त कियाथा। अनेकांत दृष्टि के कारण ही पंडित जवाहरलाल नेहरु को अंतर्राष्ट्रीय प्रतिष्ठा प्राप्त हुई और वे विश्व के दार्शनिक विचारक समझे जाने लगेथे। इस अवसर पर बेंगलूरु के दिगंबर व श्वेतांबर समाज के अनेक श्रद्धालु मौजूद थे। आचार्यश्री शुक्रवार को यहां से पार्श्व सुशील धाम की ओर विहार करेंगे।

LEAVE A REPLY