बेंगलूरु/दक्षिण भारतयहां नेहरुनगर (माधवनगर) स्थित शांतिनाथ जिनालय का शिलान्यास उत्सव आचार्यश्री चंद्रयशसूरीश्वरजी व प्रवर्तकश्री कलापूर्णविजयजी की निश्रा में शुक्रवार को संपन्न हुआ। पातीबाई भारतमल वेदमूथा परिवार द्वारा निर्मित इस जिनालय कार्यक्रम में शुक्रवार प्रातः शुभ मुहूर्त में ॐं पुण्याहं, पुण्याहं व जयश्री शांतिनाथ दादा के जयकारों के बीच कुर्मशिला व दिशाशिलाओं की स्थापना की गई। इस अवसर पर आचार्यश्री ने वेदमूथा परिवार के द्वारा हुए इस पुण्य कार्य की अनुमोदना करते हुए कहा कि परमात्मा का जिनालय निर्माण जैन संस्कृति की धरोहर है। उन्होंने कहा कि जहां जैन हों वहां जिनालय अवश्य ही होना चाहिए। चंद्रयशजी ने कहा कि इतिहास गवाह है कि अनेक प्राचीन जिनालय वर्तमान समय में भी भूखण्डों से निकल रहे है। उन्होंने कहा कि जीवन में परमात्मभक्ति ही सर्वोत्कृष्ट पुण्यबंध और कर्मनिर्जरा का कारण है। आचार्यश्री ने कहा कि जिनालय में होने वाली भक्ति का लाभ वेदमूथा परिवार को भी मिलेगा। वेदमूथा परिवार के मांगीलाल ने सभी का स्वागत किया। जिनालय का प्रतिष्ठा उत्सव एक जुलाई को होगा।

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