बेंगलूरु/दक्षिण भारत शहर के तेरापंथी सभा विजयनगर के तत्वावधान में बुधवार रात्रि में अर्हम भवन में मुनिश्री रणजीतमुनिजी व रमेशमुनिजी के सान्निध्य में आचार्यश्री महाप्रज्ञजी का ९९वाँ जन्मदिवस प्रज्ञा दिवस के रुप में मनाया । इस मौके पर आदिचुनचनगिरि मठ के श्री सौम्यनाथस्वामीजी मुख्य अतिथि के रुप में उपस्थित थे। इस मौके पर मुुमुक्षु खुशबू आच्छा का मंगल भावना कार्यक्रम भी आयोजित किया गया। मुनिश्री रणजीतकुमारजी ने कहा कि आचार्य महाप्रज्ञजी एक विरले योगी थे । वे ऐसे महापुरुष थे जो स्थूल जगत को छो़डकर सूक्ष्म जगत में जीते थे। मुनिश्री रमेशकुमारजी ने कहा कि आचार्य महाप्रज्ञजी अध्यात्म जगत के पुरोधा थे। व्यक्तित्व की पहचान का आधार होता है आचार, विचार और व्यवहार और आचार्यश्री तीनो में उत्तम कोटि के महापुरुष थे। श्री सौम्यानाथस्वामीजी ने कहा कि तेरापंथ धर्म संघ के सभी आचार्य महात्यागी रहे हैं । आदिचुनचुनगिरी एवं तेरापंथ धर्म संघ का निकट सम्बन्ध रहा है। स्व. श्री बालगंगाघरस्वामीजी एवं आचार्यश्री महाप्रज्ञजी एवं डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम ने मिलकर अनेक मानवसेवा के कार्य किए। तीनों ने मिलकर विश्वशांति की प्रेरणा दी थी। दीक्षार्थिनी मुमुक्षु खुशबू आच्छा ने कहा कि जन्म से ही कोई व्यक्ति महान नहीं होता जो युगों युगों तक ज्ञान के माध्यम से प्रकाशित रहता है वह महान होता है । उनका जन्म सार्थक बन जाता है। तेरापंथ सभा विजयनगर के अध्यक्ष बंशीलाल पितलीया ने सभी का स्वागत किया। तेरापंथ युवक परिषद अध्यक्ष दिनेश मराठी ने खुशबू आच्छा का जीवन परिचय दिया। इस मौके पर अणुव्रत समिति बेंगलूरु के अध्यक्ष कन्हैयालाल चिप्प़ड, धनराज टांटिया, उम्मेदमल नाहटा, तेरापंथ महिला मंडल विजयनगर की मंत्री महिमा पटावरी ने आचार्य महाप्रज्ञ के जीवन दर्शन के बारे अपने विचार व्यक्त किए। कार्यक्रम का संचालन तेरापंथ सभा के मंत्री कमल ताते़ड ने किया तथा तेयुप के सहमंत्री श्रेयांस गोलछा ने आभार व्यक्त किया।

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