हैदराबाद। यहां पान बाजार स्थित जैन भवन से मंगलवार को विहार कर पंन्यासश्री अरुणविजयजी व मुनिश्री हेमंतविजयजी सिकंदाबाद के कृष्णनगर विस्तार के मंत्रेश्वर पार्श्वनाथ भगवान के मंदिर पहुंचे। एक दिवस पूर्व इस मंदिर की प्रथम वर्षगांठ पर प्रथम ध्वजारोहण कार्यक्रम संपन्न हुआ। यहां मुनिश्री हेमंतविजयजी ने अपने प्रवचन में मंगलवार को कहा कि राग और द्वेष दोनों कर्मबंध का कारण है। राग को ज्यादा खतरनाक एवं धीमे जहर के समान बताते हुए मुनिश्री ने कहा कि रागाधीन मनुष्य परपदार्थों के भोग में सुख को ़ढं़ुढता है। वह बहिरात्म भाव है और वही दुख का मुख्य कारण हैं। उन्होंने कहा कि व्यक्ति एवं वस्तु के प्रति का राग कर्मबंध करवाता है। हेमंतविजयजी ने कहा कि वैराग्य या वीतरागी का आलंबन आदर्श सामने नहीं रहा तो राग समाज में विकार का कारण बनेगा, इसीलिए रागी मनुष्य के सामने वैराग्य का आदर्श जरुरी है। उन्होंने कहा कि आज का युग राग बहुल है इस युग में वैराग्य चर्चा अधिक प्रासंगिक है। वैरागी महात्माओं के प्रवचन सुनने की सीख देते हुए मुनिश्री ने कहा कि वैरागी का संग करने से श्रद्धा जगती है और उससे राग रुपी भभकती आग पर पानी का छि़डकाव संभव हैं। उन्होंने कहा कि आत्मा और परमात्मा में अधिक फर्क नहीं है, केवल दिशा बदलने की आवश्यकता है। वे बोले कि जिसकी दृष्टि बदल जाती है उसका अहंकार भी बोध में बदल जाता है।

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