चेन्नई। यहां तांबरम स्थित जैन स्थानक में विराजित श्रमण संघीय सलाहकार मुनिश्री सुमतिप्रकाशजी के सुशिष्य डॉ. समकितमुनिजी ने बुधवार को कहा कि वाणी फूलों का गुलदस्ता है तो कांटों का झा़ड भी है। उन्होंने कहा कि जीभ शरीर का अच्छा अंग है और बुरा भी। मुनिश्री ने कहा कि वाणी अच्छी होती है तो हमारे लिए सब अच्छे बन जाते हैं। उन्होंने कहा कि यदि हम अश्लील, अशिष्ट भाषा का प्रयोग करते हैं तो वह वाग् देवता का अपमान होता है, इसलिए वाणी का विवेकपूर्वक उपयोग करना चाहिए, क्योंकि वाणी मधुर हो तो रिश्ते भी मधुर बन जाते हैं। समकितमुनिजी ने कहा कि कटु वाणी बोलकर हम प्रेम करने वालों को नफरत करने के लिए मजबूर कर देते हैं। सभ्य वाणी से रिश्तों में कटुता का जहर खत्म होता है और रिश्ते स्वर्ग के समान बन जाते हैं। उन्हांेने यह भी कहा कि वाणी का विवेक के साथ सदुपयोग किया जाए तो परिवार में शांति का माहौल स्थापित हो सकता है। विवेक खत्म होने से परिवार में शांति खत्म हो जाती है और आत्मा की गति बिग़ड जाती है। स्थानीय एसएस जैन संघ के अध्यक्ष पारस भलगट ने बताया कि मुनिश्री यहां से विहार कर गुरुवार को पेरुइंगलतुर जैन स्थानक पहुंचेंगे।

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