‘प्रभु का भक्त कठिन घड़ी में भी नहीं घबराता’

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दक्षिण भारत न्यूज नेटवर्कबेंगलूरु। दिव्य ज्योति जाग्रति संस्थान द्वारा महालक्ष्मी लेआउट के प्रसन्न वीरांजनैया देवस्थान में सात दिवसीय श्रीमद् भागवत कथा के तीसरे दिन मंगलवार को साध्वीश्री मेरुदेवा भारती ने अजामिल, प्रहलाद एवं होलिका दहन प्रसंग प्रस्तुत किया। उन्होंने बताया कि किस प्रकार भक्त प्रहलाद की ईश्वर में असीम आस्था थी। उसे कई प्रकार के दुख दिए गए परन्तु वह मुश्किल से मुश्किल घ़डी में भी नहीं घबराता है। सदैव धैर्य को धारण करता है, क्योंकि भक्त चिंता नहीं, सदा चिंतन करता है और जो ईश्वर का चिंतन करता है वह स्वतः ही चिंता से मुक्त हो जाता हैभगवान श्रीकृष्ण ने श्रीमद्भगवतगीता में कहा कि जो भक्त ईश्वर को अनन्य भाव से भजते हैं उनका योगक्षेम स्वयं भगवान वहन करते हैं। साध्वीश्री ने कहा कि ईश्वर का चिंतन तभी होगा जब हमारे अंदर उनके प्रति भाव होंगे आज कितने ही लोग ईश्वर को पुकार रहे हैं किंतु वह प्रकट क्यों नहीं होता? द्रौपदी की ही लाज क्यों बचाई, प्रहलाद की रक्षा क्यों हुई, संत मीरा या कबीर जी की तरह वह हमारी रक्षा क्यों नहीं करता?इसका कारण यह है कि हमने ईश्वर को देखा नहीं, जाना नहीं, उनकी शरणागति प्राप्त नहीं की, इसलिए हमारा प्रेम ईश्वर से नहीं हो पाया। भले ही हम ने भक्ति के नाम पर बहुत कुछ किया हो, प्रहलाद ने नारद जी की कृपा से परमात्मा को अपने अंतर घट में जाना था, जिस से उनका ईश्वर पर दृ़ढ विश्वास था। इसलिए इतने कष्टों के आने पर भी वे नहीं घबराए और उनके विश्वास और प्रेम की लाज रखने के लिए ही श्रीहरि को स्वयं बार-बार आकर उनकी रक्षा करनी प़डी और अंततः नरसिंह अवतार लेना प़डा। मंगलवार को होलिका दहन प्रसंग के पश्चात फूलों की होली खेली गयी जिसमें ‘अरे मच गयो शोर, देखो आई होली आई…., फागुन को मेलो आयो रे सांवरा रंग लगावन आयो रे…..’’ आदि भजनों पर भक्त झूम उठे। कार्यक्रम के अंत में साध्वी उन्मेशा भारती जी ने कन्ऩड भाषा में प्रसंगों के सार को रखा। कार्यक्रम में साध्वीश्री मेरुदेवा भारतीजी के साथ सुश्री पंचरत्ना भारतीजी, आरती भारतीजी, मंजू भारतीजी, ज्योति भारतीजी व अवनी भारतीजी की भी उपस्थिति रही। कार्यक्रम में ब़डी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित थे। सात दिनों तक चलने वाली कथा प्रतिदिन शाम ४ बजे से ७ बजे तक चल रही है।

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