कान्नियमवा़डी/दक्षिण भारतयहां गणाधिपति इंजीनियरिंग कॉलेज में उपस्थित छात्र-छात्राओं को संबोधित करते हुए डॉ. मुनिश्री अमृतकुमारजी ने कहा कि संतुलित जीवन जीने के लिए शिक्षा के साथ मानसिक विकास, शारीरिक विकास ,भावनात्मक विकास और आध्यात्मिक विकास भी अपेक्षित है। तमिल सभ्यता विश्व की पुरातनतम सभ्यताओं में से एक है, तमिलनाडु की सांस्कृतिक विशेषताओं में एक, मंदिर-निर्माण है। यह मंदिरों की भूमि है, इस वजह से यहां सदियों से आध्यात्म की गंगा प्रवाहित होती रही है। संत कवि तिरुवल्लुर का तिरुक्कुरल तमिल का प्रसिद्ध ग्रंथ है। नशामुक्ति पर सभी छात्र-छात्राओं को प्रेरणा देते हुए मुनिश्री ने कहा-नशामुक्त जीवन, अच्छे जीवन का आधार है ।मुनिश्री नरेशकुमारजी ने स्मृति विकास के लिए अनुप्रेक्षा के साथ महाप्राण ध्वनि के प्रयोग करवाए। अप्रमाद केंद्र के जागरण के प्रयोग करवाए। इस अवसर पर संस्था के चैयरमेन प्यारेलाल पितलिया, सुगनचंद परमार, अमरचंद लुंक्क़ड, घीसुलाल बोहरा आदि उपस्थित थे। आगंतुकों का स्वागत प्रिंसिपल डॉ. एम भारती ने किया। धन्यवाद ज्ञापन धन्यवाद ज्ञापन दुरैकुमार ने किया। स्थानीय भाषा तमिल में अनुवाद अरविंद सेठिया ने किया। कार्यक्रम का आयोजन राकेश रांका ने किया।

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