वालाजा। संतश्री चन्द्रप्रभजी ने कहा है कि धर्म सा्त्विवक और पवित्र जीवन जीने का दिव्य मार्ग है। यह केवल नरक से बचने के लिए या स्वर्ग पाने के लिए नहीं है, अपितु मन के विकारों को शांत करने के लिए और कषायों से मुक्त होने के लिए है। धर्म की चर्चा कम, चर्या ज्यादा करनी चाहिए। उन्होंने कहा कि धर्म हमें न तो नास्तिक बनाता है और न ही आस्तिक। धर्म तो हमें केवल वास्तविक बनाता है। संतश्री ने कहा कि धर्म पग़डी और दम़डी नहीं है कि जब चाहो तब उतार दो और जब चाहो तब पहन लो अथवा जब चाहो तब दम़डी की तरह भुना लो। धर्म तो चम़डी है जो सदा हमारे जीवन का हिस्सा बनी रहती है। उन्होंने कहा कि जो क्रोध के वातावरण में प्रेम जगा दे वह धर्म है, लोभ के वातावरण में संतोष जगा दे वह धर्म है, जो अहंकार के वातावरण में सरलता और विलासिता के वातावरण में संयम के भाव पैदा कर दे उसी का नाम धर्म है। वे बुधवार को स्थानीय जैन गोल्ड में आयोजित प्रवचन कार्यक्रम में श्रद्धालुओं को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि धर्म को केवल परम्पराओं में बांधने की बजाय प्रेक्टिकल स्वरूप में जीने की कोशिश करनी चाहिए। कर्तव्य पालन करने के लिए हमेशा सजग रहने की सीख देते हुए चन्द्रप्रभजी ने कहा कि यदि परिवार के सभी लोग अपने-अपने कर्तव्य के पालन करने के प्रति सजग रहेंगे, तो परिवार कभी नहीं टूटेगा और अपना घर भी स्वर्ग बन जाएगा। उन्होंने कहा कि इंसान होकर इंसान के काम आना दुनिया का सबसे महान धर्म है। जीवन में शुभ-लाभ के साथ-साथ शुभ-खर्च के प्रति भी उदार रहना चाहिए, क्यांेकि जहां शुभ-खर्च के द्वार खुले रहते हैं वहां शुभ-लाभ स्वतः होता रहता है। उन्होंने कहा कि अंतरमन में त्याग, वैराग्य और संयम के प्रति श्रद्धा रखनी चाहिए, अपने कषाय और मनोविकारों पर विजय प्राप्त करनी चाहिए। अगर हम निर्मल कर्म और विचारों के मालिक बनते हैं, तो हमारा स्वरूप चलते-फिरते मंदिर जैसा ही होगा। उन्होंने कहा कि आप जिस धर्म के अनुयायी हैं, उसका आचरण जरुरी है, लेकिन अन्य धर्मों के प्रति भी प्रेम आवश्यक है। उन्होंने कहा कि सहज-सरल धर्म का मार्ग जीने के लिए अहिंसा, अचौैर्य सत्य, शील और अपरिग्रह को जीवन में जीने की कोशिश करें, कभी किसी का दिल न दुखाएं, पराई वस्तु और धन को अपना बनाने की कोशिश न करें। इससे पूर्व संतश्री ललितप्रभसागरजी, चन्द्रप्रभसागरजी और डॉ. मुनिश्री शांतिप्रियसागरजी के वालाजा पहुंचने पर ब़डी संख्या में जैन समाज के श्रद्धालुओं ने बधावणा किया। इस अवसर पर मानवीय सेवा के क्षेत्र में अमूल्य योगदान देने और समाज की सेवा करने के लिए ‘समाजरत्न’’ सज्जनराज जैन का संतों के सान्निध्य में जैन समाज द्वारा माला और साफा पहनाकर अभिनंदन किया गया। कार्यक्रम में अनेक श्रावक-श्राविकाएं उपस्थित थे। संतवृंद गुरुवार को सुबह ८ बजे अरपाक्कम स्थित शांतिगुरुदेव दादावा़डी पहुंचेंगे। उनका सायंकालीन प्रवास पेरूमुगई स्थित बालाजी मोटर्स में रहेगा जहां रात्रि ८ बजे सत्संग कार्यक्रम आयोजित होगा।

संतों के सान्निध्य में जैन समाज द्वारा सज्जनराज जैन का सम्मान किया गया।

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