दक्षिण भारत न्यूज नेटवर्कचेन्नई। यहां के सेन्थामंगलम स्थित पार्श्वनाथ जैन श्वेताम्बर मंदिर में उपस्थित जनसमूह को संबोधित करते हुए आचार्यश्री पुष्पदंतसागरजी महाराज ने कहा कि सम्यक दर्शन का दूसरा पायदान नि:कांक्षित अंग है। यदि परमात्मा की भक्ति करते हैंै तो हमें प्रभु से कुछ मांग नहीं करनी चाहिए क्योंकि भक्ति की छाती पर मांग च़ढने से भक्ति नष्ट हो जाती है। मांगने से प्रार्थना दूषित हो जाती है। परमात्मा के चरणों में जाने पर हमें कुछ मांगना नहीं चाहिए क्योंकि वह देने वाला सब जानता है । परमात्मा का सागर बहुत विशाल है और हमारी अंजुलि बहुत छोटी है। यदि हम अपनी अंजुलि के अनुसार मांगेंगे तो बहुत कम होगा और यदि परमपिता परमात्मा को देना है तो वह बहुत देगा। आचार्यश्री ने कहा कि व्यक्ति को तो भक्ति,प्रार्थना और आराधना करनी चाहिए फल की इच्छा नहीं करनी चाहिए। मांग के बादलों को भी प्रभु भक्ति के बीच में नहीं आने देना चाहिए। आचार्यश्री ने कहा कि ज्योति का आनंद लेना चाहते हैं तो हमें अपने हृदय व मन रूपी कांच का साफ रखना होगा।

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