चेन्नई। गुरुवार को आचार्यश्री सुदर्शनलालजी म. सा. ने दादावा़डी में अपने प्रवचन में कहा कि जैसे हड्डी के टुक़डे को चबाते हुए कुत्ते की जीभ में खून आ जाता है लेकिन आसक्तिवश आनन्द का आभास करता है। इ्द्रिरयों के सुख को आत्मा का सुख मानना अनंत काल की भूल है। भवि आत्मा ही सत्य को समझकर संसार में निवृत्त होकर संयम के पथ पर अग्रसर हो जाती है। आत्मा की पवित्रता का हेतु संयम है। मुमुक्षु रिखबचन्द सुराणा और मुमुक्षु पवनकुमार सुराणा की भागवती दीक्षा का शुभारंभ पाट बिठाई सम्पन्न हुई। शुक्रवार को प्रवचन सुबह एवं दोपहर में मंगलगीत का आयोजन है। प्राज्ञ जैन संघ के अध्यक्ष कमलचन्द खटो़ड ने कहा कि दोनों मुमुक्षु बंधुओं की भागवती दीक्षा २२ जनवरी को दादावा़डी में सम्पन्न होने जा रही है। एसएस जैन संघ छोटी पादु के सदस्य इस मौके पर उपस्थित थे। प्राज्ञ संघ के मंत्री सुरेशचन्द आब़ड ने संचालन किया। मुमुक्षु रिखबचन्द सुराणा और मुमुक्षु पवनकुमार सुराणा

Facebook Comments

LEAVE A REPLY