दक्षिण भारत न्यूज नेटवर्कचेन्नई। यहाँ क्रोमपेट में राधा नगर स्थित जैन स्थानक में क्रांतिकारी संत श्री कपिल मुनिजी म. सा. ने शनिवार को होली चातुर्मास के लिए मंगल प्रवेश किया। इस मौके पर संघ के पदाधिकारीगण व सदस्यों ने मुनिश्री की अगवानी करके स्वागत किया। रविवार से होली चातुर्मास के उपलक्ष्य में आयोजित प्रवचन माला के तहत रविवार को प्रवचन के दौरान कहा कि भगवान महावीर ने जो सन्देश प्रदान किया उसके पीछे प्रसिद्धि पाने की मानवीय दरिद्रता नहीं बल्कि जीव मात्र के उत्थान व कल्याण का पवित्र आशय था। मनुष्य के जीवन का प्रत्येक क्षेत्र आध्यात्मिक बने इसके लिए जीवन का मूल्य समझना बेहद जरुरी है। जिनकी दृष्टि में पैसे का मूल्य है उनकी दृष्टि में जीवन का मूल्य नहीं होता है। भौतिकवादी दृष्टिकोण जीवन का मूल्यांकन नहीं करने देता है। उन्होंने कहा कि हम किसी भी चीज का कितना मूल्यांकन करते हैं इसका महत्वपूर्ण मापदंड यही है कि हम उसे कितना समय प्रदान करते हैं। अगर मनुष्य ने जीवन की कदर की होती तो उसका बेशकीमती वक्त धन अर्जन के बजाय जीवन को संवारने में व्यतीत होता। मुनिश्री ने कहा कि पुण्य की प्रबलता से ही संत समागम मिलता है। संत समागम से जीवन में परिवर्तन की लहर आती है। परिवर्तन आने पर ही विवेक के प्रकाश से जीवन का कोना कोना जगमगाता है जीवन में पूर्णता और संतुष्टि का अहसास होता है। मुनिश्री ने कहा कि इतिहास में ऐसे अनेक उदहारण हैं जो संत समागम के लाभ और महत्त्व को रेखांकित करते हैं। इस संसार में जो कुछ भी प्राप्त हुआ है उसकी प्राप्ति में ये याद रखना चाहिए कि शरीर,सत्ता और संपत्ति सब कुछ उधार मिला है। मिला हुआ कहते ही उसे हैं जो एक दिन मिट और बिछु़ड जाएगा। मिटने वाली चीजांे को अमिट मानकर उनके लिए मर मिटना समझदारी का प्रमाण कतई नहीं है। मुनिश्री ने कहा कि इस संसार में जो प्रेम, अपनत्व, सौहार्द और भाईचारा दिखाई देता है उसका श्रेय महापुरुषों की वाणी को जाता है। परम्परा से वही सर्वहितकारी वाणी आज संतों के माध्यम से आप तक पहुँच रही है। जब तक उस वाणी को आचार में प्रकट नहीं करेंगे तब तक जीवन का कल्याण संभव नहीं है। धर्म के नाम पर कोरे क्रियाकांड कर लेने से मुक्ति नहीं होगी। राग द्वेष की आंच को मंद करके ही जीवन में सरलता और समता आदि सद्गुणों को आत्मसात करने पर ही भव भ्रमण को मिटाया जा सकेगा। ये बिडम्बना है कि साधना में भी भौतिक कामनाओं का आक्रमण हो रहा है। जिसके चलते जीवन असंतोष की आग में जलकर कोयला बनने की कगार पर है। साधना का एक मात्र उद्देश्य कर्मो की कारा को तो़डने का होना चाहिए। इस मौके पर मुनिश्री ने होली चातुर्मासिक पर्व पर सामूहिक तेला तप आराधना के लिए श्रद्धालु श्रावक श्राविकाओं का आह्वान किया। अध्यक्ष महावीरचंद बोहरा ने बताया कि मुनिश्री के प्रवचन क्रोमपेट जैन स्थानक में प्रतिदिन ९.१५ बजे से नियमित रूप से होंगे। धर्मसभा का संचालन मंत्री अशोक बोहरा ने किया।

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