जिनशासन की श्रेष्ठतम आराधना है नवपद की : आचार्य चंद्रयश

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दक्षिण भारत न्यूज नेटवर्कबेंगलूरु। आचार्यश्री चंद्रयशसूरीश्वरजी व उपप्रवर्तकश्री कलापूर्णविजयजी की निश्रा में स्थानीय वीवीपुरम स्थित सिमंधर शांतिसूरी मंदिर में नवपद ओली आराधना संपन्न होगी। इसी क्रम में गुरुवार को संतों का सज्जनराव सर्कल से गाजे-बाजे से प्रवेश हुआ। इस अवसर पर अपने उद्बोधन में आचार्यश्री ने कहा कि उत्तम आराधना करने का श्रेष्ठतम अवसर मनुष्य जन्म में मिलता है और नवपद की आराधना जिनशासन की श्रेष्ठतम आराधना, साधना और तपोराधना है। इसे शाश्वती आराधना बताते हुए चंद्रयशजी ने कहा कि नव दिनों तक आयंबिल पूर्वक यह तप किया जाता है। उन्होंने कहा कि रसने्द्रिरय को जीतने का यह कठोर आयंबिल तप है। अधिकाधिक संख्या में श्रद्धालुओं से इस तप का लाभ लेने की प्रेरणा भी आचार्यश्री ने दी। शुक्रवार से नित्य प्रातः ९.१५ बजे से नवपद के विषय व श्रीपाल-मयणा के रास पर आचार्यश्री का प्रवचन होगा। प्रातः ६.३० बजे मंदिर में वर्धमान शक्रस्तव अर्हद् अभिषेक भी होगा। यह जानकारी चंदुलाल भंडारी व मीठालाल पावेचा ने दी।

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