चेन्नई। यहां सैल्यूर से विहार कर तांबरम पहुंचे श्रमण संघीय संत, आगमज्ञाता श्री समकितमुनिजी ने मंगलवार को अपने उद्बोधन में कहा कि मनुष्य के मन पर उसके आसपास के वातावरण का बहुत प्रभाव प़डता है। उन्होंने कहा कि दुष्ट व्यक्ति की संगत आपके विचार भी बुरे बना देती है। मुनिश्री ने कहा कि जिनकी सोच बुरी है, उनका जीवन जहर के समान है उनसे दूर ही रहना चाहिए, क्योंकि संगत का प्रभाव बहुत जल्दी प़डता है। उन्होंने कहा कि अनेक बार गलत मार्गदर्शन मिलने के कारण व्यक्ति भटक जाता है। फिल्मकारों की संगत करने से जीवन फैशनेबल बनेगा तो साधुओं की संगत करने से जीवन में सादगी आती है। समकितमुनिजी ने कहा कि अच्छे दोस्त, सलाहकार व संगत मिलना यह जीवन की अनमोल पूंजी होती है। अच्छे कुल में पैदा होने से आदमी महान नहीं होता बल्कि जिसकी करणी ऊंची होती है वह महान होता है। इस मौके पर साध्वीश्री दिव्यज्योतिजी ने कहा कि संत समागम मिलन अति दुर्लभ है। उन्होंने कहा कि संत वह होता है जो स्वयं सत्य की राह पर चले और दूसरों को भी प्रेरणा दे। साध्वीश्री ने कहा कि जो सत्य मंे भ्रमित हो जाता है वह भवभ्रमण करता रहता है। पारसमल भलगट ने कार्यक्रम का संचालन किया।

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