गुन्टूर। यहां नगर के गुंटूर गौ संरक्षण संघम के तत्वावधान में आयोजित प्रतिष्ठा महोत्सव में आचार्य श्रीमद् विजय जयन्तसेन सूरीजी के शिष्य मुनिश्री संयमरत्न विजयजी, मुनिश्री भुवनरत्न विजयजी के करकमलों द्वारा गुंटूर नगर की गौशाला में शनिवार को तीर्थंकर परमात्मा एवं अन्य देवी-देवताओं की भव्यातिभव्य प्रतिष्ठा सम्पन्न हुई जिसमें लोगांे ने उत्साह के साथ भाग लिया।संघम के प्रवक्ता मुकेश चोप़डा ने बताया कि शनिवार सुबह मुनिश्री की निश्रा में प्रतिष्ठा का विधिविधान प्रारम्भ हुआ एवम् शुभ मुहूर्त में श्री पार्श्वनाथ परमात्मा, श्री कृष्णजी, श्री हनुमानजी, श्री गणेशजी एवं पद्मावती देवी की प्रतिमा प्रतिष्ठित करने का संपूर्ण लाभ आहोर प्रवासी एवं गुंटूर निवासी शा. अमृतलाल रायचंद मंडोत को प्राप्त हुआ। चौमुखी महावीर स्वामी की प्रतिमा प्रतिष्ठित करने का लाभ पूर्व दिशा में धानसा प्रवासी घेवरचंद जवा बंदामुथा पश्चिम दिशा में सियाणा प्रवासी आशीषकुमार जोगराज भंडारी, उत्तर दिशा में आहोर के अर्हम गोल्ड परिवार, दक्षिण दिशा में गुडाबालोतान प्रवासी अम्बिका बैंकर्स परिवार ने लाभ लिया। इस मौके पर एक विशाल धर्मसभा का आयोजन हुआ जिसमें मुनिश्री संयमरत्न विजयजी ने परमात्मा व देवों के नामों की आध्यात्मिक व्याख्या करते हुए ब़डा ही मार्मिक महत्व समझाया। गौ माता का महत्व बताते हुए कहा कि ‘ग’’ से गंगा और ‘य’’ से यमुना अर्थात गाय में गंगा और यमुना जैसी पवित्र नदियों का वास है। गौमाता तीर्थ स्वरूपा है, जहाँ भी गौमाता अपने चरण रख दे,वह तीर्थ बन जाता है। गौ माता के दूध में वात्सल्य भरा होता है। गौ माता का दुग्ध पीने वाला कहीं भी जाए लेकिन वह अपने परिवार, राष्ट्र, संस्कृति से जु़डा रहता है। स्वाभिमानी होने के साथ उसमें सत्य-असत्य को जानने का विवेक होता है।गाय का दूध पीने वाला सर्वहितैषी, परोपकारी, कर्तव्यनिष्ठ, सहिष्णु एवं सतोगुणी होता है। जो प्रतिदिन खाली पेट आधा कप देशी गाय का गौमूत्र पीता है, उसकी आँख, कान, सिर व शरीर की समस्त बीमारियां नष्ट हो जाती है। माँ की तरह गाय हमारा पालन करती है, इसलिए उसे माता कहते हैं। गौमाता की सेवा करने वालों के जीवन में कभी भी धन-धान्य की कमी नहीं रहती।कार्यक्रम के दौरान अध्यक्ष सुखराज हुण्डिया ने सभी आगन्तुकांे का स्वागत किया। मुनिश्री की प्रेरणा से गौशाला हेतु विशाल भूमि क्रय करने के लिए दानदाताओं की ओर से सहयोग राशियां लिखवाई गई। उल्लेखनीय है कि वर्तमान में गौशाला में लगभग १३०० गौवंशांे की सेवा का लाभ विभिन्न लोगों को प्राप्त हो रहा है। कार्यक्रम के अंतर्गत संघम के सचिव विनोद बागरेचा ने गौशाला की गतिविधियों व संचालन की कार्यप्रणाली पर प्रकाश डालकर उपस्थित लोगांे को ज्यादा से ज्यादा इस गौशाला के कार्यो में सहयोग हेतु आह्वान किया। मरुधर के सांथू ग्रामवासी डूंगरसिंह राजपुरोहित ने मुनिद्वयश्री को कामली ओ़ढाने का लाभ प्राप्त किया। इसी पावन प्रसंग पर कौस्तुभा निवास विजयवा़डा के श्रद्धालुओं ने मुनिश्री को श्री सिद्धचक्र नवपद ओली में निश्रा प्रदान करने हेतु विनंती की। मुनिश्री ने ओली आराधना हेतु विजयवा़डा में आने की स्वीकृति प्रदान की। इससे पूर्व शुक्रवार रात्रि को गौशाला के प्रांगण में विशाल भक्ति संध्या का आयोजन हुआ जिसमें राजस्थान से आए विख्यात कलाकरो ने सुरीले संगीत व भजनों से माहौल को भक्तिमयी बना दिया। प्रतिष्ठा महोत्सव में स्थानीय सांसद जयदेव गल्ला, तेलुगु देशम पार्टी के नेता मद्दाल गिरी बाबू के साथ कई नेताओं व अधिकारियों ने भाग लिया।

Facebook Comments

LEAVE A REPLY