दक्षिण भारत न्यूज नेटवर्कबेंगलूरु। यहां गो़डवा़ड भवन में नौ दिवसीय नवपद ओली का शुभारंभ शुक्रवार को आचार्यश्री रत्नसेनसूरीश्वरजी की निश्रा में हुआ। इस अवसर पर अपने प्रवचन में आचार्यश्री ने कहा कि जो आत्माएं गुणवान हैं वही परमसुखी हैं। उन्होंने कहा कि सुखी बनने के लिए सरकार ने ‘छोटा परिवार-सुखी परिवार’’ का नारा दिया है, लेकिन संसार में न तो छोटे परिवार वाला सुखी है और न ही ब़डे परिवार वाला। आचार्य रत्नसेनजी ने कहा कि जैन शासन में सुखी बनने के लिए गुणवान बनने का उपाय बताया गया है। जो गुणवान है, उसे प्रतिकूलता का द्वेष नहीं है और अनुकूलता का राग भी नहीं हैं। उन्होंने कहा कि ऐसे वीतराग ही सच्चे सुखी है। आचार्यश्री ने कहा कि सामान्य रुप से उपकार तो हर कोई व्यक्ति कर सकता है, लेकिन संसार के सभी उपकार अल्पकाल तक रहने वाले हैं। चिरस्थायी उपकारी तो अरिहंत परमात्मा हैं, जो धर्म शासन की स्थापना करके जगत के सभी जीवों को शाश्वत सुखी बनने का मार्ग बतलाते हैं। उन्होंने कहा कि अरहिंतादि नवपदों की आराधना करने से आत्मा स्वयं अपने शुद्ध स्वरुप को प्राप्त करती है। नवपद की आराधना के द्वारा श्रीपाल राजा का को़ढ का रोग नष्ट हुआ था व मात्र नौ भवों में मोक्षप्राप्ति को निश्चित किया।

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