गंगावती /दक्षिण भारत गंगावती में नवनिर्मित सालेचा स्वाध्याय भवन का उद्घाटन मंगलवार को उपपर्वतक नरेशमुनिजी, मुनिश्री शालिभद्रजी व कोप्पल के गवसिद्देश्वर महास्वामी के सान्निध्य में लाभार्थी सुखराज भरतकुमार सुरेशकुमार सालेचा परिवार द्वारा किया गया। इस मौके पर नरेन्द्रमुनिजी ने कहा कि वे व्यक्तित्व धन्य होते हैं जो अपने द्वारा अर्जित की हुई पुण्य की लक्ष्मी का सदुपयोग समाज एवं धर्म के लिए करते है। सालेचा परिवार ने जमीन से लेकर भवन निर्माण करवाकर संघ को सुर्पुद करना का ऐसा ही ऐतिहासिक कार्य किया है । मुनिश्री शालिभद्रजी ने गंगावती संघ को सौभाग्यशाली संघ की उपमा देते हुए कहा कि अब सभी श्रावक श्राविकाओं का दायित्व बनता हैं कि इस स्वाध्याय भवन में सामायिक, स्वाध्याय, जप, तप एंव अधिक से अधिक धर्म ध्यान के कार्यो का सम्पादित करें। साध्वी डा. प्रतिभाश्रीजी म.सा. ने धन के सदुपयोग की चर्चा करते हुए कहा कि धन की तीन गति है, दान भोग और नाश। जो व्यक्ति अपनी लक्ष्मी का दान नहीं करता अथवा उसका उपयोग नहीं करता तो वह धन अवश्य नाश होता है। इस मौके पर ब़डी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित थे। संघ की ओर से लाभार्थी सालेचा परिवार का सम्मान किया गया तथा अभिनंदन पत्र भेंट किया गया। कार्यक्रम का संचालन सुमेर कोचर ने किया।

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