शिक्षा और सेवा के द्वारा गांवों में एकल अभियान की “क्रांति’

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दीप जलाकर समिधा कार्यक्रम का शुभारंभ करते हुए अतिथि व पदाधिकारीगण
दीप जलाकर समिधा कार्यक्रम का शुभारंभ करते हुए अतिथि व पदाधिकारीगण
  • वनबंधु परिषद का समिधा कार्यक्रम आयोजित
  • एकल अभियान के चेयरमैन का किया सम्मान

बेंगलूरु। यहां होटल बेंगलूरु इंटरनेशनल मेंे शनिवार शाम को वनबंधु परिषद के एकल परिवार का “समिधा’ विषयक कार्यक्रम आयोजित हुआ जिसमें बतौर मुख्य अतिथि शामिल हुए एकल अभियान ट्रस्ट के चेयरमैन बजरंग बागड़ा का सम्मान किया गया। इन्हें गुलदस्ता भेंटकर व शॉल ओढ़ाकर सत्कार किया गया। शहर की अनेक स्वयंसेवी व सामाजिक संस्थाओं के प्रतिनिधियों की उपस्थिति में एकल अभियान की विस्तृत जानकारी दी गई। दीप प्रज्ज्वलन व ओंकार के उच्चारण से शुरु हुए कार्यक्रम में फे्रण्ड्‌स ऑफ ट्रायबल सोसायटी (एफटीएस) के बेंगलूरु चैप्टर के अध्यक्ष रमेश अग्रवाला ने सभी का स्वागत किया। अग्रवाला ने संस्था के उद्‌देश्यों पर प्रकाश डाला। उन्होंने वनवासी बच्चों व गांवों के विकास अथवा ग्रामीणों की उन्नति में उपस्थित जनों के योगदान की का उल्लेख किया और समाज से भविष्य में भी सहयोग की अपेक्षा की।

सचिव वैभव गुप्ता ने एकल परिवार का विस्तृत परिचय देते हुए कहा कि वर्ष 1989 से भारत में क्रियाशील “एकल’ अभियान वर्ष 2005 से कर्नाटक प्रांत में कार्य कर रहा है तथा कर्नाटक प्रांत के 9 जिलों में 1470 एकल विद्यालय संचालित हो रहे हैं। गुप्ता ने कहा कि शहर से सुदूर 200 से 250 किमी. तक गांवों में जहां सरकार नहीं पहुंचती वहां वनबंधु यानी एकल परिवार का सदस्य पहुंचता है। वीडियो प्रजेंटेशन के माध्यम से एकल परिवार के प्रयासों यानी “भारत निर्माण’ की संक्षिप्त प्रस्तुति देते हुए वैभव ने बताया कि शिक्षा और सेवा के द्वारा देश के गांवों में एकल अभियान ने क्रांति ला दी है। त्याग और परिश्रम के दम पर ग्रामीण परिवेश के लोगों को शिक्षित करते हुए बुनियादी व रोजगारपरक शिक्षा के साथ स्वास्थ्य और पर्यावरण के प्रति जागरुक करते हुए स्वावलंबी बनाया जा रहा है। एकल परिवार के बेंगलूरु चैप्टर के संरक्षक मुरारीलाल सरावगी ने अपनी वन यात्रा का स्वयं का एक अनुभव साझा करते हुए कहा कि आंखों से देखी हुई चीज को बयान नहीं किया जा सकता, इसके लिए उन्होंने सभी उपस्थित जनों से एक बार वनयात्रा के लिए समय निकालकर सहभागी बनने की अपील की। साथ ही उन्होंने कहा कि गांवों में निश्चित रुप से एकल के प्रति विश्र्वास और बच्चों के भविष्य के निर्माण में जो प्रयास किए जा रहे हैं वे बेहद सराहनीय और अभिनव कदम हैं।

दीप जलाकर समिधा कार्यक्रम में उपस्थित समाज के लोग

इस अवसर पर मुख्य अतिथि बजरंग बागड़ा ने कहा कि वर्तमान में 63 हजार एकल विद्यालयों की संख्या को वर्ष 2019 में एकल की 30वीं वर्षगांठ तक एक लाख करने का लक्ष्य लिया गया है। उन्होंने कहा कि एकल कोई एनजीओ नहीं बल्कि भारत के समग्र विकास में वनवासी और ग्रामीण क्षेत्रों के लोगों को अण्डरलाइन करते हुए अपनी भूमिका का बखूबी निर्वहन कर रहा है। बागड़ा ने कहा कि एकल विद्यालय एक आचार्य एक विद्यालय के सिद्धांत पर आधारित है।

एकल विद्यालय में शिक्षा ही नहीं, अपितु विद्यार्थी को संस्कारी, स्वावलंबी और आत्म निर्भर बनाकर उसे गांव में ही रह कर रोजगार के लिए सहायता की जाती है। उन्होंने कहा कि एकल विद्यालय हर जाति व धर्म के लिए है और एकल विद्यालय की सोच है कि जो जिस धर्म का है वह अपने धर्म का ही अनुपालन करते हुए एक नेक इंसान बने। उन्होंने युवा शक्ति का आह्‌वान करते हुए कहा कि इस अभियान में वे जुड़कर हर एक नागरिक को शिक्षित और स्वस्थ बनाने में अपना योगदान दें।

चेयरमैन बजरंग बागड़ा का सम्मान

इस अवसर पर कर्नल अशोक, मखनकिशोर गोयल, चेन्नई के श्यामसुंदर दम्माणी, बाला वॉरियर, एकल अभियान की कर्नाटक प्रांत की महिला समिति की अध्यक्ष सरिता भंसाली, बिपिनराम अग्रवाल, डॉ. सतीश जैन, मणिशंकर ओझा, राज अग्रवाल, सुरेश शर्मा सहित अनेक लोग मौजूद थे। कार्यक्रम के संयोजक रवि सिंघानिया, सचिन पाण्डिया, सुशील बंसल व स्थानीय चैप्टर के अनेक कार्यकर्ताओं ने आयोजन की सफलता में सहयोग किया। सभी का आभार वैभव गुप्ता ने जताया।

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