पैसे को अंगुली पकड़कर चलना सिखाइए : गजेन्द्र कोठारी

1
286

  • जीतो ने आयोजित की “दि आर्ट ऑफ वेल्थ’ विषयक सेमिनार

बेंगलूरु। “आप पैसे के लिए काम करते हैं या पैसा आपके लिए काम करता है। मेहनत आप कर रहे हैं और आपका धन आराम कर रहा है? बीते जमाने की बात बीत गई, वर्षों से सोए हैं लेकिन “वेकअप’ अब आंखे खोलिए। अब पैसे को अंगुली पकड़कर चलना सिखाइये..। जिस प्रकार ग्लोबलाइजेशन युग में तकनीक बदल रही है वैसे ही लोगों को अपनी सोच को वृहद बनाते हुए इस बारे में सोचने की जरुरत है।’ यह कहा अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर विख्यात मुंबई की एटिका वेल्थ मैनेजमेंट कंपनी के प्रबंध निदेशक एवं सीईओ गजेन्द्र कोठारी ने। रविवार को यहां रेसकोर्स रोड़ स्थित एक होटल में जैन इंटरनेशनल ट्रेड ऑर्गेनाइजेशन (जीतो) के तत्वावधान में “दि आर्ट ऑफ वेल्थ’ यानी वित्तीय ढ़ांचा और धन संपदा प्रबंधन विषयक सेमिनार में कोठारी ने एफडी, गोल्ड, इक्विटीज, रियल स्टेट सहित अनेक प्रकार के निवेश के ऑप्शन के बारे में विस्तार से वीडियो प्रजेंटेशन द्वारा हिंदी और अंग्रेजी भाषा में बेहद सरल तरीके से समझाया

इन विषयों पर देश और दुनिया में 300 से अधिक सेमिनार में अपना व्याख्यान दे चुके तथा अनेक बिजनेस चैनल्स की डिबेट्‌स में प्रमुख वक्ता रहे कोठारी ने कहा कि व्यक्ति सबसे पहले अपने परिवार का ऐसेट है। उसे सर्वप्रथम अपने जीवन को प्रोटेक्ट करना जरुरी है। सरकारी, निजी व अंतर्राष्ट्रीय बाजार में निवेश के अनेक विकल्पों पर प्रकाश डालते हुए उन्होंने कहा कि सपने बड़े होंगे तो सोच बड़ी करनी होगी। कोठारी ने कहा कि हमें अपनी आमदनी में से बचत को महत्व देते हुए भविष्य व सेवानिवृत्ति समय को अभी से सुनिश्चित करना होगा। किसी भी प्रकार की बीमा कंपनी में निवेश को गलत बताते हुए कोठारी ने कहा कि टर्म इन्श्यूरेंस निवेश, म्यूचुअल फण्ड व इक्विटी में व्यक्ति को अपने वित्त सलाहकार की मदद से निवेश करना चाहिए। उन्होंने जोर देकर कहा कि व्यक्ति को भेड़चाल (जैसे की बीटकॉइन्स) की बजाय निवेश सोच समझकर ही करना चाहिए क्योंकि पैसा कतई शार्टकट से बन नहीं सकता है।

यहां आदर्श कॉलेज के छात्र रहे 38 वर्षीय कोठारी ने बेंगलूरु में पहली बार अपनी विशिष्ट शैली से बड़ी संख्या में मौजूद युवाओं और बिजनेस घरानों से जुड़े महिला-पुरुषों को निवेश के एडवांटेज व डिस-एडवांटेज यानी दोनों पक्ष बताते हुए प्रभावित किया। मशहूर वैज्ञानिक अल्बर्ट आंइस्टीन के कथन “कंपाउण्ड इंट्रेस्ट दुनिया का आठवां अजूबा है’ का जिक्र करते हुए गजेन्द्र कोठारी ने कहा कि सबसे ज्यादा और जल्दी पैसा किसी बिजनेस से नहीं बनाया जा सकता लेकिन पैसा जब पैसे के लिए काम करेगा तो जल्दी बढ़ेगा। शॉर्ट मूवी “वन इडियट’ व फिल्म बागबां के कुछ दृश्य दिखाते हुए कोठारी ने कहा कि घर-घर की कहानी और वास्तविकता यही है। उन्होंने कहा कि रिटायरमेंट के समय में आपका बचत का पैसा ही आपका साथी होगा उस समय न आपके बच्चे साथ होंगे न ही कोई परिजन। सिस्टेमेटिक इन्वेस्टमेंट प्लान (एसआईपी) अर्थात पैसा कमाने के सही ढ़ंग में व्यक्ति को अनुशासित और व्यवहारकुशल होना जरुरी है।

घर में दो बच्चों के बाद तीसरे बच्चे के रुप में बचत और “इक्विटी निवेश’ को जन्म देने की प्रेरणादायी सीख के साथ कोठारी ने कहा कि 25 वर्षों बाद दो बच्चे आपको संभालें या नहीं, लेकिन तीसरा बच्चा (इक्विटी) जरुर संभाल लेगा और यह 25 वर्षों का परफोर्मेंंस भाग्य से नहीं स्किल से ही आएगा। व्यक्ति को ऑनलाइन और डिजिटल युग के साथ चलने व लांग टर्म निवेश के हिमायती कोठारी ने यह भी कहा कि जो आज दिखा है वह आज तक ही सीमित रहे, दुनिया निश्चित रुप से कल बदली हुई नजर आ सकती है इसलिए आने वाले कल के रिलेवेंट को भी देखना होगा। कोठारी ने सत्र के दौरान एवं बाद में अनेक लोगों की जिज्ञासाओं का समाधान कोठारी ने किया। इससे पूर्व कार्यक्रम की शुरुआत दीप प्रज्ज्वलन के साथ हुई। जीतो बेंगलूरु के चेयरमैन पारस भंडारी, प्रमुख वक्ता गजेंद्र कोठारी, सेमिनार के संयोजक हिम्मत जैन, मंत्री रंजीत सोलंकी, कोषाध्यक्ष जयंतीलाल बालर, पूर्व मंत्री नरेंद्र सामर, अल्पसंख्यक समिति के मार्गदर्शक हेमराज मन्नू व मीडिया संयोजक सज्जनराज मेहता आदि ने इसमें सहभागिता निभाई। सभी का स्वागत पारस भंडारी ने किया। हिम्मत जैन ने कार्यक्रम की रूपरेखा प्रस्तुत की तथा श्रेयांश गांधी ने मुख्य वक्ता गजेंद्र कोठरी का परिचय दिया। गजेन्द्र कोठारी का मेमेंटो भेंटकर सत्कार भी किया गया। सभी का आभार जताते हुए जीतो के मंत्री रंजीत सोलंकी ने कहा कि पावरफुल होने के लिए हर क्षेत्र में नॉलेज का होना जरुरी है, इस “नॉलेज’ के लिए ही जीतो हमेशा विविध विषयों पर राष्ट्रीय-अंतर्राष्ट्रीय स्तर के वक्ताओं को जैन समाज के लोगों के समक्ष रुबरु करवाता है। “लर्निंग’ को लागू करने की बात के साथ उन्होंने कहा कि जैन सुनता है, समझता है और उसे लागू करता है तभी आज “नंबर वन’ भी है। कार्यक्रम का संचालन सुरेन्द्रनाथ ने किया।

यूथ के लिए जीतो ने बहुत अच्छा कार्यक्रम किया। निवेश और फाइनेंस के बारे में खूब अण्डरस्टेंडिंग मिली कि हम कहां, कैसे और कब-कब निवेश कर सकते हैं। ऑवर ऑल मैंने अपने आज के सण्डे के समय को यहां आकर एक तरह से महत्वपूर्ण निवेश के रुप में उपयोग किया। थेंक्स जीतो एण्ड थेंक्स गजेन्द्र सर।

-शिखा, प्रतिभागी, सीनियर ऑफिसर-निजी कंपनी।

Facebook Comments

1 COMMENT

  1. लेख पंढने से अफसोस होरहा है कि मे वहां पर क्यो नही था

LEAVE A REPLY