दक्षिण भारत न्यूज नेटवर्कबेंगलूरु। यहां महालक्ष्मी लेआउट पहुंचे पुष्पगिरि तीर्थ के प्रणेता आचार्यश्री पुष्पदंतसागरजी ने बुधवार को अपने उद्बोधन में कहा कि मनुष्य जीवन अद्भुत आलोक का महाद्वार है। उन्होंने कहा कि व्यक्ति की यात्रा के दो ही आयाम हैं देवत्व और पशुता। उन्होंने कहा कि मनुष्य को अनंत संभावनाओं का सेतु कहा गया है। पुरुषार्थ और संयम की उत्कृष्ट पात्रता का धारक मनुष्य को बताते हुए आचार्यश्री ने कहा कि जीवन में मुक्ति के पथ का चुनाव करने का सामर्थ्य व पात्रता मनुष्य में ही है। इस दृष्टि से वह देवों से भी श्रेष्ठ है, क्योंकि देवता जीवन में संयम धारण नहीं कर सकते हैं।उन्होंने कहा कि मुनि मुद्रा से ब़ढकर कोई अन्य भिन्न शिवमार्ग न था, न है और न होगा। पुष्पदंतजी ने यह भी कहा कि धर्म की रक्षा धर्मात्माओं द्वारा ही होती है। उन्होंने कहा कि साधु सेवा से इहलोक व परलोक दोनों ही सुधरते हैं। शाम को आचार्यश्री संघ सहित श्रीरामपुरम पहुंचे। यहां जयश्री-पद्मप्रसाद, प्रकाश-अर्चना कासलीवाल व अरुण-पुष्पा सेठी सहित अनेक लोगों ने संतश्री की अगवानी कर आरती उतारी। गुरुवार को सुबह आचार्यश्री कोरमंगला की ओर पदविहार करेंगे।

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