चेन्नई/दक्षिण भारतयहां के किलपॉक स्थित कोठारी अकेडमी महिला कैम्पस में मुनिश्री ज्ञानेन्द्रकुमारजी ने कहा कि स्वस्थ और सुखी जीवन में संतुलित विकास की अवधारणा को विकसित करना जरूरी हैं। मुनिश्री यहां ‘सुखी और स्वस्थ जीवन के रहस्य’’ विषय पर आयोजित कार्यक्रम में बोल रहे थे। मुनिश्री ने आगे कहा कि आज मानव भौतिक विकास की एकांकी दौ़ड में दौ़ड रहा है, सुखी व स्वस्थ जीवन के लिए आध्यात्मवाद और भौतिकवाद में संतुलन जरूरी है। हम पदार्थ के दास नहीं अपितु स्वामी बनें। मुनिश्री ने श्रद्धालुओं को संबोधित करते हुए कहा कि तनाव, निराशा, हताशा से दूर रहने के लिए प्रसन्नता के रसायन का सेवन करें। भावनात्मक स्वास्थ्य के लिए अनाग्रह, अनासक्ति, अनावेश की साधना करें। शारीरिक स्वास्थ्य के लिए आसन, प्रणायाम, ध्यान व गमनयोग करे। बौद्धिक स्वास्थ्य के लिए सकारात्मक चिंतन का विकास करे। मुनिश्री ने आगे कहा कि स्वस्थ और सुखी जीवन के लिए आहार संयम का विवेक जरूरी है। पेट को भगवान का मंदिर बनाएं, कचरे का डिब्बा नहीं। आहार को दबा-दबा कर नहीं, चबा-चबा कर खायें। मुनिश्री विमलेश कुमारजी सुखी और स्वस्थ जीवन का रहस्य बताते हुए कहा कि शिकायत नहीं, धन्यवाद शब्द का उपयोग करे, जो हुआ अच्छा हुआ, जो नहीं हुआ उससे भी अच्छा हुआ। यह भी बीत जायेगा जैसे सूत्रों को अपनाए तो जीवन सुखी बन सकता है। मुनिश्री सुधाकरजी ने कहा कि क्रोध नियन्त्रण, इच्छाओं का संयम, परिस्थितियों के साथ संतुलन, व्यवस्थित दिनचर्या, सकारात्मक चिंतन ही सुखी जीवन के रहस्य हैं। मुनिश्री दीपकुमारजी ने कहा कि स्वस्थ रहने के लिए खूब खुलकर हँसीये, आध्यात्मिक गीत गुनगुनाऐ, मानव शरीर को हमेशा सकारात्मक दिशा दे। मुनिश्री सुबोध कुमारजी ने तमिल भाषा में विचार रखते हुए कहा कि सुखी और स्वस्थ जीवन के रहस्य बाहर नहीं हमारे भीतर हैं। नमस्कार महामंत्र के मंगल स्मरण के बाद हेमन्त डूंगरवाल ने मंगलाचरण किया। विनोद पितलिया, नवीन बोहरा, तेरापंथ महिला मंडल की सदस्यों ने अपने विचारों की अभिव्यक्ति दी। कार्यक्रम के आयोजक प्यारेलाल विनोद, संजय, सुनील पीतलिया परिवार थे। प्यारेलाल पीतलिया ने सभी का स्वागत किया। परिषद के मंत्री गजेन्द्र खंटे़ड ने आभार व्यक्त किया। संचालन मुनिश्री सुधाकर स्वामी ने किया।

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