मैसूरु/दक्षिण भारत यहां वर्द्धमान स्थानकवासी जैन श्रावक संघ सिद्धार्थनगर के तत्वावधान में सीआईटीबी चोल्ट्री में चातुर्मासार्थ विराजित श्रमण संघीय उपप्रवर्तकश्री श्रुतमुनिजी ने शुक्रवार को अपने प्रवचन में आत्मा को अजर-अमर अविनाशी बताते हुए कहा कि कर्म आत्मा के साथ आने वाले कर्म और आत्मा का संबंध अटूट होता है। उन्होंने कहा कि शरीर, रुप, नाम, गौत्र, इंद्रियां आदि स्थान बदलती रहती है, लेकिन आत्मा ही है जो की अमर है। मुनिश्री ने कहा कि आत्मा भव से परभव की यात्रा कराती है। श्रुतमुनिजी ने इस अवसर पर अष्टमंगल की व्याख्या भी की। आत्म आनंद पाने के लिए सद्पुरुषार्थ करने की सीख देते हुए मुनिश्री ने कहा कि व्यक्ति के हृदय में प्रीत यानी दूसरों के प्रति प्रेम होना चाहिए।अक्षरमुनिजी ने भी विचार रखे तथा तपस्वियों की अनुमोदना की। संघ के अध्यक्ष शशांक कोठारी ने सभी का स्वागत किया। मंत्री मदनलाल पोरवा़ड ने संचालन किया।

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