आरकोणम/दक्षिण भारतयहां के जैन श्वेताम्बर तेरापंथ सभा के तत्वावधान में बुधवार को तेरापंथ धर्मसंघ के ग्यारहवें अधिशास्ता आचार्य महाश्रमणजी का नौवां पट्टोत्सव मुनिश्री सुधाकरजी व मुनिश्री दीपकुमारजी के सान्निध्य में जैन स्थानक में मनाया गया। इस अवसर पर मुनिश्री सुधाकरजी ने कहा, आचार्य महाश्रमण वर्तमान युग के जीवन दृष्टा आचार्य हैं। उनका जीवन ज्ञान, वैराग्य और साधना का अद्भुत संगम है। वे कुशल प्रवचनकार, प्रखर साहित्यकार, महान यायावर, सफल समाज सुधारक और आध्यात्म के महान संदेश वाहक है। मुनि श्री ने कहा कि आचार्य महाश्रमणजी सन्त परम्परा के उज्जवल नक्षत्र हैं, क्योंकि उनके विचारों में कृष्ण का माधुर्य, राम की मर्यादा, महावीर की साधना, बुद्ध की मध्यम दृष्टि, कबीर की क्रांति, मीरा की भक्ति और आइंस्टीन की वैज्ञानिक सच्चाई है।मुनिश्री दीपकुमारजी ने कहा कि आचार्य महाश्रमणजी ध्रुव योगी हैं क्योंकि प्रारंभ से ही उनके योग बहुत स्थिर रहे हैं। वे बहुत विनम्र हैं। अपने गुरूओं और रत्नाधिक संतों के प्रति आचार्य अवस्था में बहुत विनय भाव रखते हैं। आचार्यश्री का संकल्प बल बहुत मजबूत हैं। उनके सामने अनेकों प्रतिकूलताएं आती रही हैं, पर उनका संकल्प बल मेरू पर्वत-सा अडोल रहा है। इस अवसर पर गजराज बरि़डया ने अपने विचार व्यक्त किए। कार्यक्रम का संचालन संजय देवडा ने किया।

Facebook Comments

LEAVE A REPLY