श्रवणबेलगोला। पुष्पगिरि तीर्थ प्रणेता आचार्यश्री पुष्पदंतसागरजी ने श्रवणबेलगोला से भगवान गोम्मटेश्वर बाहुबली का महामस्तकाभिषेक कार्यक्रम सम्पन्न कर तमिलनाडु की ओर विहार प्रारंभ कर दिया है। विहार करते हुए आचार्यश्री वराहसान्द्रा होते हुए सोलूर पहुंचे जहां उपस्थित श्रद्धालुओं को संबोधित करते हुए आचार्यश्री ने कहा कि उपवन में भांति भांति के फूल खिले हैं। सभी एक भूमि का रस पीकर उत्तपन्न हुए हैंै परन्तु देव शास्त्र और गुरु एक होते हुए भी मनुष्य अपने आप को अलग अलग जाति, पंथ में बांटता है। अगर यह अलगांव की नीति, पृथकीकरण की नीति, फूटपरस्ती की नीति इसी प्रकार कायम रही तो एक दिन समाज का अस्तित्व खतरे में प़ड जाएगा। आचार्यश्री ने कहा कि यदि हम मानवता, धर्म और समाज का उत्थान चाहते है तो हमें इन संकीर्ण मानसिकता से ऊपर उठना चाहिए। हमें एकता की परम छांव के तले आकर प्रेम, मैत्री के साथ सभी को समान अधिकार देते हुए सबका विकास करना चाहिए।

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