नई दिल्ली। उच्चतम न्यायालय ने वर्ष १९८४ के सिख-विरोधी दंगों से जु़डे १८६ मामलों की फिर से जांच के लिए दिल्ली उच्च न्यायालय के सेवानिवृत्त न्यायाधीश एसएन ढींगरा के नेतृत्व में गुरुवार को तीन-सदस्यीय विशेष जांच दल (एसआईटी) गठित कर दिया। न्यायालय इस मामले की सुनवाई अब १९ मार्च को करेगा। न्यायमूर्ति ढींगरा दिल्ली उच्च न्यायालय से वर्ष २०११ में सेवानिवृत्त हुए हैं। गौरतलब है कि केंद्र सरकार द्वारा फरवरी २०१५ में गठित एसआईटी ने पिछले वर्ष २४१ मामलों को बंद कर दिया था और १२ मामलों में आरोप दायर किए थे। इसके औचित्य की जांच के लिए उच्चतम न्यायालय ने पिछले साल अगस्त में पूर्व न्यायाधीश के एस राधाकृष्णन और न्यायमूर्ति जेएम पांचाल की समिति गठित की थी। समिति ने २४१ बंद मामलों में से १८६ को फिर से खोलने और इसकी पुन: जांच कराए जाने की सिफारिश की थी। समिति ने कहा था कि इन मामलों की जांच की ही नहीं गई और पुरानी एसआईटी ने इसकी फाइलें बंद कर दी थी। दोनों न्यायाधीशों की समिति की रिपोर्ट प़ढने के बाद न्यायालय ने बुधवार को सुनवाई के दौरान कहा था कि उन मामलों की पुन: जांच के लिए उच्च न्यायालय के सेवानिवृत्त न्यायाधीश के नेतृत्व में एक नया जांच दल गठित किया जाएगा। न्यायालय ने यह स्पष्ट किया था कि इस प्रस्तावित जांच दल में आईपीएस का एक सेवानिवृत्त अधिकारी और एक कार्यरत अधिकारी शामिल किया जाएगा। सेवानिवृत्त आईपीएस अधिकारी सेवानिवृत्ति के समय पुलिस उपमहानिरीक्षक से नीचे के पद पर नहीं होना चाहिए। १९८४ में तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की हत्या के बाद भ़डके सिख-विरोधी दंगों में दिल्ली में २,७३३ लोग मारे गए थे।

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