बेंगलूरु। नेशनल एयरोनॉटिक्स लेबोरेटरीज (एनएएल) द्वारा विकसित सारस विमान ने बुधवार को अपने नए अवतार में पहली सफल उ़डान पूरी की। करीब नौ वर्ष के बाद यह पहला अवसर था जब सारस ने सफल उ़डान भरी। मार्च-२००९ में सारस के दुर्घटनाग्रस्त हो जाने के बाद से इस विमान का परिचालन पूरी तरह से बंद हो गया था। हालांकि सारस का नया अपग्रेड संस्करण सभी मानकों पर खरा उतरा और १४-सीटर विमान ने आसमान में ४० मिनट तक उ़डान भरी। सारस पीटी १ एन (१४ सीटर) की उ़डान के पायटल विंग कमांडर यूपी सिंह, समूह के कप्तान आर.वी. पनीकर और भारतीय वायुसेना के विमान और सिस्टम परीक्षण प्रतिष्ठान (एएसटीई) से ग्रुप कैप्टन केपी भट थे। विमान ने एचएएल हवाई अड्डे से करीब ११ बजे उ़डान भरी और १४५ नॉट (समुद्री मील की गति) से ८,५०० फीट की अधिकतम ऊंचाई पर गया। उ़डान के दौरान किरण विमान से ग्रुप कैप्टन बद्रीश ने सारस की निगरानी। वैज्ञानिक और औद्योगिक अनुसंधान परिषद (सीएसआईआर) की अग्रणी प्रयोगशाला एनएएन में पिछले नौ महीनों से ४० वैज्ञानिकों और इंजीनियरों की एक युवा टीम इस परियोजना पर काम कर रही थी। र्ङैंफ् ·र्ष्ठैं फ्य्त्र् प्रय्रुर्ङैं ब्रुंश्च झ्यद्यद्भह्ज्द्मय् ृद्ध डप्ख्रष्ठप्रय्र्‍ द्धद्मर्‍ गौरतलब है कि वर्ष-१९९० में भारत और रुस की साझा परियोजना के रूप में सारस पर काम शुरु हुआ था लेकिन सोवियत संघ के विघटन के बाद रुस ने इस परियोजना से हाथ पीछे खींच लिए थे। बाद में एनएएल अपने दम पर परियोजना को लेकर आगे बढी और स्वदेश निर्मित सारस का निर्माण हुआ। हालांकि वर्ष-२००४ में पहली सफल उ़डान के बाद वर्ष-२००९ में विमान के दुर्घटनाग्रस्त होने पर परियोजना रुक गई। अब फिर से सारस को उसकी ऊंचाई तक पहुंचाने के लिए ४० वर्ष आयु के युवा वैज्ञानिकों की एक टीम इस पर काम कर रही है और इसी क्रम में १४ सीटों वाले पहले विमान का सफल परीक्षण उ़डान हुआ। टीम का प्रयास अब इस स्वदेशी विमान को १९ सीटों तक ले जाना है।

Facebook Comments

LEAVE A REPLY