ऊधमपुर। सेना ने कहा है कि शहीद होने वाले सैनिकों को किसी संप्रदाय से जो़डकर नहीं देखा जाता। उत्तरी कमान के कमांडर ने डी अंबु ने बुधवार को यहां संवाददाताओं से कहा कि सुंजवान आतंकवादी हमले में मारे गए सात जवानों में से छह के मुस्लिम होने संबंधी ऑल इंडिया मजलिस ए इत्तेहादुल मुस्लिमीन के अध्यक्ष असदुद्दीन ओवैसी के बयान का उल्लेख किए बिना कहा कि शहीद होने वाले जवान का धर्म नहीं देखा था। कमांडर अंबु ने सुंजवान हमले की चर्चा करते हुए कहा कि आतंकवादी संगठन सांठ-गांठ कर राज्य में हमलों की योजना बना रहे हैं लेकिन सेना पूरी तरह सजग है और उनके नापाक इरादों को विफल करने के लिए तैयार है। सेना कमांडर ने यहां अपने कमान की स्थापना समारोह के बाद कहा, तीनों आतंकवादी संगठन हिजबुल मुजाहिदीन, जैश-ए-मोहम्मद या लश्कर-ए-तैयबा से मिले हुए हैं और इनके आतंकवादी एक संगठन से दूसरे संगठन में जाते रहते हैं। चाहे घाटी हो या फिर जम्मू। उरी में वर्ष २०१६ में हुए हमले के बाद सेना की सक्रिय रणनीति जारी रहेगी क्योंकि जम्मू-कश्मीर में भारतीय सेना नियंत्रण रेखा के पास पाकिस्तान पर हावी है। उत्तरी कमान के जनरल ऑफिसर कमांडिंग इन चीफ लेफ्टिनेंट जनरल डी. अंबु ने कहा कि पिछले वर्ष दुश्मन को तीन गुना से ज्यादा क्षति पहुंचाई गई। उन्होंने कहा, पाकिस्तान और इसकी आईएसआई न केवल जम्मू-कश्मीर में आतंकवाद में संलिप्त है बल्कि प़डोसी देशों में भी आतंकवाद में संलिप्त है क्योंकि इसके सहयोग, प्रशिक्षण और रणनीति के बगैर आतंकवाद ज्यादा नहीं टिकेगा। अधिकारी को २०१७ में शानदार प्रदर्शन के लिए ३९ सेना मेडल और २६ इकाइयों को यूनिट प्रशंसा पत्र दिया गया। राज्य में शनिवार को हुए सुंजवां आतंकवादी हमले के बारे में उन्होंने कहा, यह हताश दुश्मन (पाकिस्तान) है जो सीमा पर हमारा सामना नहीं करने पर खुद को इस तरह की गतिविधियों में संलिप्त करता है। यह नैसर्गिक है कि दुश्मन को काफी नुकसान हो रहा है और आसान विकल्प देख रहा है। सीमा पर हम खुद को मजबूत कर रहे हैं और हम अच्छी तरह तैयार हैं।

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