वर्ष 2018-19 का बजट पेश : गांव, गरीब और किसान पर ध्यान

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सरकार द्वारा माध्यमिक एवं उच्च शिक्षा के लिए आयातित समानों पर लगने वाले तीन प्रतिशत उपकर को समाप्त कर दिया गया है। आयातित अप्रसंस्कृत काजू, सौर टेंपर्ड शीशे और कॉक्लीअर इम्प्लांट का कच्चा माल और एक्सेसरीज सस्ती होंगी। बजट में इन उत्पादों पर आयात शुल्क घटाने का प्रस्ताव किया गया है। आयातित कच्चे काजू पर शुल्क की दर को पांच से घटाकर ढाई प्रतिशत किया गया है। सौर टेंपर्ड ग्लास पर अब कोई शुल्क नहीं लगेगा। अभी इस पर पांच प्रतिशत का शुल्क लगता है। कॉक्लीअर इम्प्लांट के कच्चे माल, पुर्जों तथा एक्सेसरीज पर शुल्क समाप्त कर दिया गया है। इन पर अभी तक ढाई प्रतिशत का शुल्क लगता है।

नई दिल्ली। देश में आम चुनावों का बिगुल बजने से पहले वित्त मंत्री अरुण जेटली ने गुरुवार को अपने अंतिम पूर्ण बजट को गांवों, ग्रामीण अर्थव्यवस्था, किसानों व बुजुर्गों पर केंद्रित रखा। इसमें शहरी यानी मध्यम वर्ग के लिए कोई ब़डी घोषणा नहीं है और आयकर स्लैब और दरों को भी यथावत रखा गया है। बजट की एक ब़डी घोषणा देश की लगभग आधी आबादी को स्वास्थ्य बीमा उपलब्ध कराने वाली दुनिया की अपनी तरह की सबसे ब़डी सरकार पोषित स्वास्थ्य बीमा योजना की शुरुआत है। बजट पेश करते हुए जेटली ने कहा कि यह आम लोगों को सरल बनाने के साथ न्यू इंडिया के निर्माण का वाहक बनेगा। प्रधानमंत्री मोदी ने बजट की सराहना करते हुए इसे किसानों, आम नागरिकों व कारोबार के अनूकूल बताया है। उल्लेखनीय भाजपा नीत राजग सरकार का कार्यकाल अगले साल समाप्त हो रहा है और इसके पहले इस साल कुछ ब़डे राज्यों में विधान सभा चुनाव भी होने जा रहे हैं। चुनाव यदि अगले साल अप्रैल में होते हैं तो यह सरकार एक लेखानुदान बजट ला सकती है।वित्त मंत्री अरूण जेटली ने आम चुनाव से पहले अपने अंतिम पूर्ण बजट को खेती-बाड़ी, गांवों व गरीबों पर केंद्रित रखा। बजट में ग्रामीण विकास, स्वास्थ्य और शिक्षा जैसे सामाजिक क्षेत्रों के लिए आवंटन बढ़ाने के साथ लघु उद्योगों के लिए अनेक पहल एवं कई रियायतों की घोषणा की गई। जेटली ने वेतनभोगी वर्ग के लिए आयकर में एक दशक बाद मानक कटौती का लाभ फिर देते हुए इसके साथ कुछ शर्तें जोड़ दी हैं। इसके अलावा बजट में मध्यम वर्ग को रिझाने वाली कोई बड़ी घोषणा नहीं है। आयकर और कॉर्पोरेट कर पर स्वास्थ्य एवं शिक्षा उपकर की दर तीन प्रतिशत से बढ़ा कर चार प्रतिशत कर दी है। उल्लेखनीय भाजपा नीत राजग सरकार का कार्यकाल अगले साल समाप्त हो रहा है और इसके पहले इस साल कुछ बड़े राज्यों में विधान सभा चुनाव भी होने जा रहे हैं। चुनाव यदि अगले साल अप्रैल में होते हैं तो यह सरकार एक लेखानुदान बजट सकती है।बजट में पेट्रोल और डीजल पर मूल उत्पाद शुल्क में दो-दो रुपए प्रति लीटर की कटौती की गई है, लेकिन उत्पाद शुल्क में उपकर का हिस्सा दो-दो रुपए ब़ढा देने से कुल उत्पाद शुल्क में कोई बदलाव नहीं होगा। खुले पेट्रोल पर मूल उत्पाद शुल्क ६.४८ रुपए से घटाकर ४.४८ रुपए और खुले डीजल पर ८.३३ रुपए से घटाकर ६.३३ रुपए प्रति लीटर किया जाएगा। उत्पाद शुल्क के अंतर्गत अतिरिक्त उत्पाद शुल्क के नाम से लगने वाले स़डक उपकर का नाम बदलते हुए इसे छह रुपए से ब़ढाकर आठ रुपए कर दिया गया है। अब इसका नाम स़डक एवं बुनियादी ढांचा उपकर होगा। इस प्रकार कुल उत्पाद शुल्क में कोई बदलाव नहीं हुआ है। ब्रांडेड पेट्रोल पर उत्पाद शुल्क ७.६६ रुपए से घटाकर ५.६६ रुपए तथा ब्रांडेड डीजल पर १०.६९ रुपए से ब़ढाकर ८.६९ रुपए प्रति लीटर कर दिया गया है।

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