नई दिल्ली/भाषाकर्नाटक में सरकार गठन को लेकर चल रही सियासी उठापटक के बीच कांग्रेस ने बुधवार को कहा कि राज्यपाल वजुभाई वाला कांग्रेस-जदएस गठबंधन को सरकार गठन के लिए आमंत्रित करने को संवैधानिक रूप से बाध्य हैं और अगर वह ऐसा नहीं करते हैं तो यह राज्य में खरीद-फरोख्त को ब़ढावा देना होगा। उसने यह भी कहा कि अगर राज्यपाल इस गठबंधन को न्योता नहीं देते हैं तो फिर राष्ट्रपति या न्यायालय के पास जाने का विकल्प खुला हुआ है।राज्यपाल द्वारा बीएस येड्डीयुरप्पा को सरकार बनाने का मौका देने से जु़डी अटकलों के बीच कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं पी चिदंबरम, कपिल सिब्बल, रणदीप सुरजेवाला और विवेक तन्खा ने कहा कि राज्यपाल के फैसले की आधिकारिक घोषणा के बाद पार्टी इन दो विकल्पों को लेकर निर्णय करेगी। उन्होंने संवाददाताओ से बातचीत में यह भी कहा कि अगर राजपाल चाहें तो उनके समक्ष ११७ विधयकों की पेशी कराई जा सकती है। सिब्बल ने गोवा के मामले में उच्चतम न्यायालय की एक टिप्पणी का हवाला दिया और कहा कि कर्नाटक के राज्यपाल बहुमत वाले गठबंधन को सरकार बनाने का न्यौता देने के लिए संवैधानिक रूप से बाध्य हैं।चिदंबरम ने कहा, ’’कांग्रेस और जदएस ने कर्नाटक में चुनाव बाद गठबंधन किया है। लेकिन राज्यपाल ने कुमारस्वामी को सरकार बनाने का अब तक न्यौता नहीं दिया। यह पता चल रहा है कि राज्यपाल ने शायद येदियुरप्पा को बुलाया है, लेकिन इसकी पुष्टि नहीं है। इसलिए हम अब तक यह मानकर चल रहे हैं कि राज्यपाल ने अब तक कोई फैसला नहीं किया। उन्होंने कहा कि अगर राज्यपाल येदियुरप्पा को बुलाते हैं तो वह खरीद-फरोख्त को ब़ढावा देंगे। उन्होंने कहा कि राज्यपाल उच्चतम न्यायालय के आदेश से बंधे हुए हैं। वह बहुमत वाले गठबंधन दल के नेता को बुलाएंगे। हम आशा करते हैं कि संविधान पर फिर से हमला नहीं होगा।सिब्बल ने कहा, ’’गोवा, मणिपुर और मेघालय में कांग्रेस सबसे ब़डी पार्टी थी, लेकिन राज्यपाल ने बहुमत वाले गठबंधन को सरकार बनाने के लिए बुलाया। उच्चतम न्यायालय ने गोवा के मामले में जो कहा वही बात कर्नाटक में लागू होनी चाहिए्।’’ उन्होंने दावा किया कि राज्यपाल ने अगर भाजपा को मौका दिया है तो इसके पीछे खरीद-फरोख्त का अवसर देने की मंशा है। ऐसा करना संविधान के खिलाफ होगा।एक सवाल के जवाब में सिब्बल ने कहा राज्यपाल का निर्णय आने के बाद हम फैसला करेंगे कि राष्ट्रपति के पास जाना है या न्यायालय जाना है। ये दोनों विकल्प हैं्। आधिकारिक घोषणा होने के बाद ही हम विकल्प का फैसला करेंगे। कुमारस्वामी द्वारा भाजपा पर विधायकों की खरीद-फरोख्त का आरोप लगाए जाने पर चिदंबरम ने कहा, ’’ मेरा मानना है कि कुमारस्वामी ने साक्ष्य के आधार पर बयान दिया होगा। जब एक पार्टी के पास बहुमत नहीं है तो फिर बिना खरीद-फरोख्त के बहुमत कैसे साबित किया जा सकता है।’’ सुरजेवाला ने कहा, ’’आज हमने राज्यपाल से कहा कि हम ११७ विधायकों को पेश करते हैं्। उन्होंने इनसे इनकार किया तो हमें लगा कि उन्होंने हमारी बात मान ली। अगर वह कहेंगे तो हम विधायकों की उनके सामने ले जाकर शिनाख्त करा सकते हैं्।’’ बता दें कि राज्य में किसी भी पार्टी को स्पष्ट बहुमत नहीं मिला है। ऐसे में प्रदेश की २२४ सदस्यीय विधानसभा में २२२ सीटों पर हुए चुनाव में भाजपा को १०४, कांग्रेस को ७८ और जेडीएस को ३८ सीटें मिली हैं। फिलहाल, बहुमत के लिए जादुई आंक़डा ११२ है, और निगाहें राजभवन पर टिकी हुई हैं।

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