नई दिल्ली। आम बजट में वेतनभोगी वर्ग को राहत देने के लिए एक बार मानक छूट को लागू किया गया है लेकिन इसके बदले यातायात भत्ता और चिकित्सा क्षतिपूर्ति के रुप में मिलने वाली सुविधा को वापस ले लिया गया है। पूर्व वित्त मंत्री पी चिदंबदरम ने वर्ष २००५-०६ में मानक छूट खत्म की थी। मंत्री अरुण जेटली ने मानक छूट एक बार फिर शुरु करने का ऐलान किया है और यह ४० हजार रुपए होगी। इस छूट की एवज में यातायात भत्ता के रूप में १९२०० रुपए और चिकित्सा क्षतिपूर्ति की मद में मिलने वाले १५ हजार रुपए की कर छूट को वापस ले लिया गया है। इस निर्णय से वेतनभोगी को विशेष फायदा नहीं होगा किंतु पेंशनभोगियों की चांदी हुई है। यातायात भत्ता और चिकित्सा क्षतिपूर्ति के तहत पहले ३४२०० रुपए पर कर लाभ मिलता था। इस सुविधा को खत्म कर अब ४० हजार रुपए की मानक छूट दी गई। इसका अर्थ यह हुआ कि वेतनभोगी को केवल ५८०० रुपए पर कर कटौती का लाभ होगा। इसका किसको कितना फायदा होगा यह इस बात पर निर्भर करेगा कि कौन किस कर स्लैब की श्रेणी में हैं। यदि करदाता पांच प्रतिशत कर स्लैब की श्रेणी में है तो उसे ५८०० रुपए पर महज २९० रुपए का फायदा होगा। बीस प्रतिशत कर स्लैब वाले को ११६० रुपए और ३० प्रतिशत कर स्लैब में फायदा १७४० रुपए का होगा। वित्त मंत्री की इस छूट का फायदा पांच लाख तक की सालाना आय वालों को ही मिलने की उम्मीद है चूंकि आयकर पर उपकर को तीन से बढाकर चार प्रतिशत किया गया है। ऐसे में आयकर पर बढे हुए उपकर के कारण मानक छूट से मिलने वाला फायदा कम होता जायेगा। ऐसी स्थिति में जो ऊंची कर स्लैब की श्रेणी में आते हैं उन पर कर ब़ढ सकता है। पेंशनभोगियों की मानक छूट फिर लागू होने से बल्ले बल्ले है। चूंकि उन्हें परिवहन भत्ता और चिकित्सा पर विभिन्न खर्चों की क्षतिपूर्ति का लाभ नहीं मिलता था। मानक छूट का उन्हें लाभ मिलेगा और उनकी कर योग्य आय चालीस हजार रुपए कम हो जाएगी।

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