नई दिल्ली। केन्द्रीय जांच ब्यूरो ने राजनीतिक दृष्टि से संवेदनशील बोफोर्स तोप सौदा दलाली कांड में आरोपी व्यक्तियों के खिलाफ सारे आरोप निरस्त करने के दिल्ली उच्च न्यायालय के वर्ष २००५ के फैसले को शुक्रवार को उच्चतम न्यायालय में चुनौती दी। हालांकि सूत्रों ने बताया कि गहन विचार विमर्श के बाद विधि अधिकारियों ने अपील दायर करने की हिमायत की क्योंकि जांच ब्यूरो ने उच्च न्यायालय के फैसले को चुनौती देने के लिए कुछ महत्वपूर्ण दस्तावेज और साक्ष्य उनके समक्ष पेश किए। इससे पहले, अटॉर्नी जनरल केके वेणुगोपाल ने जांच ब्यूरो को सलाह दी थी कि उच्च न्यायालय के वर्ष २००५ के फैसले को चुनौती देने वाली भाजपा नेता अजय अग्रवाल की याचिका में ही बतौर प्रतिवादी अपना मामला बनाए। जांच एजेन्सी द्वारा फैसला सुनाए जाने के ९० दिन के भीतर उच्चतम न्यायालय में विशेष अनुमति याचिका दायर करने में विफल रहने पर अजय अग्रवाल ने याचिका दायर की थी। भारत और स्वीडन की हथियारों का निर्माण करने वाली एबी बोफोर्स के बीच सेना के लिए १५५एमएम की ४०० हाविट्जर तोपों की आपूर्ति के बारे में २४ मार्च, १९८६ में १४३७ करो़ड रुपए का करार हुआ था। इसके कुछ समय बाद ही १६ अप्रैल, १९८७ को स्वीडिश रेडियो ने दावा किया था कि इस सौदे में बोफोर्स कंपनी ने भारत के शीर्ष राजनीतिकों और रक्षाकार्मिकों को दलाली दी। इस मामले में २२ जनवरी, १९९० को केन्द्रीय जांच ब्यूरो ने आपराधिक साजिश, धोखाध़डी और जालसाजी के आरोप में भारतीय दंड संहिता और भ्रष्टाचार निवारण कानून के तहत एबी बोफोर्स के तत्कालीन अध्यक्ष मार्टिन आर्दबो, कथित बिचौलिये विन चड्ढा और हिन्दुजा बंधुओं के खिलाफ प्राथिमकी दर्ज की थी। इस मामले में जांच ब्यूरो ने २२ अक्टूबर, १९९९ को चड्ढा, ओतावियो क्वात्रोच्चि, तत्कालीन रक्षा सचिव एसके भटनागर, आर्दबो और बोफोर्स कंपनी के खिलाफ पहला आरोप पत्र दायर किया था। दिल्ली में विशेष सीबीआई अदालत ने चार मार्च, २०११ को क्वात्रोच्चि को यह कहते हुए आरोप मुक्त कर दिया था कि देश उसके प्रत्यपर्ण पर मेहनत से अर्जित राशि खर्च करना बर्दाश्त नहीं कर सकता क्योंकि इस मामले में पहले ही २५० करो़ड रुपए खर्च हो चुके हैं। क्वात्रोच्चि २९-३० जुलाई १९९३ को देश से भाग गया ओर कभी भी मुकदमे का सामना करने के लिए देश की अदालत में पेश नहीं हुआ। बाद में १३ जुलाई, २०१३ को उसकी मृत्यु हो गई।

बोफोर्स मामले में सीबीआई की ओर से अपील न दायर किए जाने के बाद पेशे से वकील अजय अग्रवाल ने अपील दायर की थी, जिसकी सुनवाई सीजेआई दीपक मिश्रा की अध्यक्षता वाली पीठ के समक्ष अब शुरू हो सकी है।

बोफोर्स तोप सौदा दलाली कांड में जांच ब्यूरो द्वारा याचिका दायर करना एक महत्वपूर्ण मोड़ है क्योंकि हाल ही में अटॉर्नी जनरल केके वेणुगोपाल ने उच्च न्यायालय के फैसले के खिलाफ 12 साल बाद अपील दायर नहीं करने की उसे सलाह दी थी।

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