नई दिल्ली। न्यायमूर्ति बी लोकुर ने शनिवार को कहा कि बच्चों को यौन शोषण से बचाने वाले कानून के प्रभाव का विश्लेषण करने का और यह देखने का समय आ गया है कि पॉक्सो अधिनियम लागू होने के बाद से करीब छह साल में क्या हासिल हुआ है। उन्होंने कहा कि आपराधिक न्याय आपूर्ति व्यवस्था पर बाल यौन अपराध संरक्षण (पॉक्सो) अधिनियम, २०१२ के असर का आकलन करने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि हत्या से ज्यादा बाल यौन शोषण के मामले होने के बावजूद हम ज्यादा समय हत्याओं पर चर्चा करने में बिताते हैं। उन्होंने सवाल पूछा कि क्या किसी व्यस्क की हत्या बाल यौन शोषण से ज्यादा महत्वपूर्ण है। न्यायमूर्ति लोकुर यहां गैर सरकारी संगठनों हक सेंटर फॉर चाइल्ड राइट्स और सेंटर फॉर चाइल्ड एंड लॉ द्वारा आयोजित एक सम्मेलन को संबोधित कर रहे थे।

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