चौतरफा घिरे कपिल सिब्बल

अयोध्या मामले में सुनवाई टालने की दी थी दलील

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नई दिल्ली। गुजरात विधानसभा का चुनावी पारा च़ढता जा रहा है। अब भाजपा को राम मंदिर का मुद्दा नए ब्रह्मास्त्र के रूप में मिल गया है। राममंदिर को लेकर मंगलवार को राजनीति तेज हो गई और भाजपा और कांग्रेस दोनों दलों ने एक दूसरे पर जमकर निशाना साधा। वहीं बुधवार को उच्चतम न्यायालय में राममंदिर मामले में सुनवाई अगले लोकसभा चुनाव तक बढाने को लेकर कपिल सिब्बल अकेले प़ड गए। गुरुवार को सबसे पहले गुजरात धंधुका में एक चुनावी रैली को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री ने वरिष्ठ कांग्रेस नेता और सुन्नी वक्फ बोर्ड के वकील कपिल सिब्बल की दलील पर क़डा एतराज जताया। उन्होंने कहा कि चुनावी लाभ के लिए महत्वपूर्ण मामलों को लटकाए रखनी वाली कांग्रेस इसे सिब्बल का निजी विचार क्यों बता रही है। मोदी ने यहां एक चुनावी सभा में कहा कि भाजपा ने उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव से पहले तीन तलाक के मुद्दे पर अदालत में अपना पक्ष दृढता से रखा जबकि लोग यह समझ रहे थे राज्य मे ब़डी संख्या में मुस्लिम मतदाता होने के चलते उनकी सरकार चुनावी नुकसान की आशंका से ऐसा नहीं करेगी। पर पार्टी ने इसकी परवाह नहीं की। राजीव गांधी के समय से ही लटके इस मामले का निराकरण करो़डांे मुस्लिम बहनों की तकलीफों को ध्यान में रख कर किया गया। अब ऐसा करने वाले को क़डी सजा वाले कानून की पहल भी की जा रही है। उन्होंने कहा कि झूठे चुनावी दावे करने वाले कांग्रेस ने अपने राजनीतिक लाभ के लिए महत्वपूर्ण प्रश्नों को ऐसे ही लटकाए रखने का काम किया है और देश की दुर्दशा की है। सिब्बल सुप्रीम कोर्ट में मुस्लिम समाज के लिए वकालत करें, बाबरी मस्जिद के पक्ष में वकालत करें और दलीलें पेश करें तो यह उनका अधिकार है, पर सुनवाई को या राममंदिर को लोकसभा चुनाव से जो़डने का क्या तुक है। इसका हक उन्हें किसने दिया है। कांग्रेस कहती है कि यह उनका निजी विचार है तो वह यह बताये कि क्या चुनाव वक्फ बोर्ड लडता है कि कांग्रेस ल़डती है। कांग्रेस को राजनीतिक लाभ देखना है कि देश का भला देखना है।

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