नई दिल्ली। भारत इस साल अप्रैल के आसपास चंद्रमा पर अपना दूसरा मिशन भेजेगा जो पहले मिशन की तुलना में कहीं ज्यादा विस्तृत होगा और इसका खर्च भी पहले मिशन की तुलना में ढाई गुणा से ज्यादा होगा। अंतरिक्ष विभाग के राज्य मंत्री जितेंद्र सिंह ने शुक्रवार को संवाददाताओं को बताया कि चंद्रयान-२ अप्रैल के आसपास भेजा जाएगा। चंद्रयान-१ में जहां सिर्फ ऑर्बिटर (चंद्रमा की परिक्रमा करने वाला) और इंपैक्टर (उसकी सतह से टकराकर उठे धूलकण के गुबार का अध्ययन करने वाला) था, वहीं दूसरे मिशन में एक ऑर्बिटर, एक लैंडर और एक रोवर (घूम-घूमकर सतह का अध्ययन करने वाला) होगा। पहले मिशन का खर्च करीब ३०० करो़ड रुपए था जबकि चंद्रयान-२ का खर्च ८०० करो़ड रुपए के आसपास रहने की संभावना है। भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) के अध्यक्ष डॉ. सिवन के. ने बताया कि चंद्रयान-२ के प्रक्षेपण के लिए अप्रैल के आसपास का समय तय किया गया है, लेकिन यदि मौसमी कारणों से उस समय प्रक्षेपण संभव नहीं हो सका तो अक्टूबर तक प्रक्षेपण करने की संभावना खुली रहेगी। डॉ. सिंह ने कहा कि चंद्रयान-२ के प्रक्षेपण से अंतरिक्ष के क्षेत्र में भारत का कद और ऊंचा हो जाएगा। इसरो ने पिछले कुछ वर्षों में कई मुकाम हासिल किए हैं। पिछले साल एक ही मिशन में १०४ उपग्रहों और दक्षिण एशिया उपग्रह का प्रक्षेपण इन्हीं उपलब्धियों में शामिल हैं। उन्होंने कहा कि अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी में भारत अग्रणी देशों में शामिल है और इसके लिए वैज्ञानिकों की तारीफ की जानी चाहिए।

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