नई दिल्ली। उच्चतम न्यायालय ने कावेरी जल में कर्नाटक का हिस्सा १४.७५ टीएमसी फुट ब़ढा दिया और तमिलनाडु का हिस्सा कम कर दिया जबकि उसकी क्षतिपूर्ति करते हुए उसे नदी के बेसिन से १० टीएमसी फुट भूजल निकालने की अनुमति प्रदान कर दी। साथ ही न्यायालय ने कहा कि पेय जल के मुद्दे को ऊंचे पायदान पर रखना होगा। शीर्ष अदालत के इस फैसले के कारण तमिलनाडु, कर्नाटक, केरल और केन्द्र शासित पुदुचेरी को कुल ७४० टीएमसी फुट जल में से क्रमश: ४०४.२५ टीएमसी फुट, २८४.७५ टीएमसी फुट, ३० टीएमसी फुट और सात टीएमसी फुट कावेरी जल हर साल मिलेगा।प्रधान न्यायाधीश दीपक मिश्रा, न्यायमूर्ति अमिताव राय और न्यायमूर्ति एएम खानविलकर की तीन सदस्यीय पीठ ने कावेरी जल विवाद न्यायाधिकरण के पांच फरवरी २००७ के फैसले के खिलाफ दायर अपीलों पर यह व्यवस्था दी। न्यायालय ने कहा कि इसके अलावा १० टीएमसी फुट पानी का इस्तेमाल पर्यावरण संरक्षण के लिए होगा जबकि चार टीएमसी फुट जल समुद्र में जाने दिया जाएगा। न्यायाधिकरण का यह अवार्ड १९ फरवरी, २०१३ को राजपत्र में प्रकाशित हुआ था। न्यायाधिकरण ने अपने अवार्ड में तमिलनाडु, कर्नाटक, केरल और पुदुचेरी को क्रमश: ४१९ टीएमसी फुट, २७० टीएमसी फुट, ३० टीएमसी फुट और सात टीएमसी फुट सालाना आबंटित किया था। शीर्ष अदालत ने केरल के लिए ३० टीएमसी फुट और पुडुचेरी के लिए सात टीएमसी फुट जल देने संबंधी न्यायाधिकरण के २००७ के निष्कर्षों से सहमति व्यक्त की। पीठ ने पेय जल के सिद्धांत और राज्य की राजधानी को आईटी शहर बेंगलूरु के वैश्विक दर्जे को ध्यान में रखते हुए कर्नाटक का हिस्सा ब़ढाने को न्यायोचित ठहराया।पीठ ने कहा, सभी राज्यों में समूची आबादी के लिए पेय जल की आवश्यकता को ऊंचे पायदान पर रखना होगा क्योंकि हम इसे समान वितरण के मामले में उच्च मौलिक सिद्धांत मानते हैं। न्यायाधिकरण ने घरेलू और औद्योगिक कार्यों के लिए कर्नाटक के हिस्से में इस आधार पर व्यापक कटौती कर दी थी कि सिर्फ एक तिहाई बेंगलूरु शहर ही कावेरी बेसिन के दायरे में आता है और उसने यह भी मान लिया था कि पेय जल की ५० फीसदी जरूरत भूजल आपूर्ति से पूरी की जाएगी। पीठ ने कहा कि कर्नाटक के ब़ढाए गए १४.७५ टीएमसी फुट के हिस्से में से १० टीएमसी फुट की वृद्धि तमिलनाडु में भूजल की उपलब्धता को ध्यान में रखते हुए की गई है। पीठ ने केन्द्र को ४६५ पेज के फैसले पर अमल सुनिश्चित करने की योजना बनाने के लिए छह सप्ताह का वक्त दिया है। पीठ ने न्यायाधिकरण के अवार्ड में संशोधन किया और साथ ही स्पष्ट किया कि किसी भी आधार पर इस समय सीमा को नहीं ब़ढाया जाएगा। पीठ ने कहा कि कावेरी जल आबंटन के मामले में यह आदेश अगले १५ साल तक प्रभावी रहेगा। अब कर्नाटक को तमिलनाडु के साथ अंतरराज्यीय सीमा पर बिलिगुडुलू से १७७.२५ टीएमसी फुट पानी छो़डना होगा।

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