नई दिल्ली। लोकसभा में मोदी सरकार के खिलाफ पहला आज अविश्वास प्रस्ताव लाने वाली तेलुगू देशम पार्टी और वाईएसआर कांग्रेस प्रस्ताव के नोटिस के पक्ष में समर्थन जुटाने की कोशिश में लगी हुई हैं लेकिन सदन में संख्याबल को देखते हुए सरकार पर फिलहाल पर कोई संकट नहीं है। सदन में अन्नाद्रमुक और तेलंगाना राष्ट्र समिति के सदस्यों के हंगामे के कारण लोकसभा अध्यक्ष सुमित्रा महाजन ने व्यवस्था न होने का हवाला देते हुए प्रस्ताव पर विचार करने से इंकार कर दिया। अध्यक्ष ने कहा कि सदन के माहौल को देखते हुए उनके लिए प्रस्ताव का समर्थन करने वाले सदस्यों की गिनती करना मुश्किल है ,इसलिए इस पर विचार नहीं किया जा सकता है। अविश्वास प्रस्ताव का मसला सदन मे उठते ही कांग्रेस ,समाजवादी पार्टी,तृणमूल कांग्रेस और वाम दलों के सदस्य तथा आल इंडिया मजलिसे इत्तहादुल मुसलमीन के असादुद्दीन ओवैसी प्रस्ताव के समर्थन में अपनी सीटों से ख़डे हो गये। इस दौरान अन्नाद्रमुक और टीआरएस के सदस्य अपनी मांगों को लेकर अध्यक्ष के आसन के समीप पहुंचकर नारेबाजी कर रहे थे । अविश्वास प्रस्ताव को तभी स्वीकार किया जा सकता है जब कम से कम ५० सदस्य उसके समर्थन में हों। तेदेपा के १६ तथा वाईएसआर कांग्रेस के नौ सदस्य है।द्बद्बत्रय् द्मष्ठ ्य·र्ैंद्भय् डप्य्ख्त्रपश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने तेलुगूदेशम पार्टी (तेदेपा) के राजग से अलग होने के फैसले का शुक्रवार को स्वागत किया और सभी विपक्षी दलों से अत्याचार, आर्थिक संकट और राजनीतिक अस्थिरता के खिलाफ नजदीकी रूप से साथ मिलकर काम करने की अपील की। ममता की यह प्रतिक्रिया आंध्र प्रदेश को विशेष दर्जा देने से केंद्र के इनकार के बाद तेदेपा द्वारा आज सुबह नरेंद्र मोदी सरकार से औपचारिक रूप से अलग होने का फैसला करने के बाद आई है।

Facebook Comments

LEAVE A REPLY