अयोध्या में हुई खुदाई पर एएसआई की पूरी रिपोर्ट भी अभी रिकॉर्ड का हिस्सा नहीं बनी है। ए सभी पक्षों की तरफ से अनुवाद करवाए गए कुल 19,950 पन्नों के दस्तावेज कोर्ट में औपचारिक तरीके से जमा होने चाहिए।इस पर भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह ने कहा, ‘कांग्रेस को इस मुद्दे पर अपना रवैया साफ करना चाहिए। एक तरफ तो राहुल गांधी गुजरात के मंदिरों में दर्शन कर रहे हैं, दूसरी तरफ कांग्रेस नेता कपिल सिब्बल राम जन्मभूमिमामले में देरी चाहते हैं। राहुल को इस पर अपनी बात रखनी चाहिए।’नई दिल्ली। उच्चतम न्यायालय में मंगलवार को बहुचर्चित अयोध्या मामले में सुनवाई शुरू हुई। न्यायालय में इस फैसले पर पूरे देश की निगाहें लगी हुई है। इस दौरान न्यायालय में काफी गहमागहमी देखने को मिली। सुन्नी वक्फ बोर्ड के वकील कपिल सिब्बल ने इस मामले की सुनवाई वर्ष २०१९ के लोकसभा चुनाव तक टालने की मांग की। उन्होंने दलील दी कि अभी तक कागजी कार्रवाई पूरी नहीं हुई है। न्यायालय के फैसले का देश में ब़डा असर प़डेगा और मामले में जल्द सुनवाई की जरूरत नहीं है। इस पर प्रधान न्यायाधीश दीपक मिश्रा ने नाराजगी जताते हुए कहा कि सभी पक्षकार जनवरी में सुनवाई के लिए तैयार हो गए थे और अब कह रहे हैं कि जुलाई २०१९ के बाद सुनवाई हो। उन्होंनेे कहा कि इससे हमें धक्का लगा है। इससे पहले प्रधान न्यायाधीश दीपक मिश्रा की अध्यक्षता में न्यायमूर्ति अशोक भूषण और न्यायमूर्ति अब्दुल नजीर की की तीन सदस्यीय विशेष खंडपीठ ने सुनवाई शुरू की। सुनवाई के दौरान सुन्नी वक्फ बोर्ड ने सुप्रीम कोर्ट से ७ जजों की खंडपीठ बनाने की मांग की। सुन्नी वक्फ बोर्ड के वकील सिब्बल ने कहा कि राम मंदिर का कानूनी समाधान सत्ताधारी पार्टी के घोषणापत्र में था। अगर अभी सुनवाई हुई तो राजनीतिक भविष्य पर असर प़डेगा। इसपर प्रधान न्यायाधीश मिश्रा ने कहा कि बाहर क्या चल रहा है उससे हमें कोई फर्क नहीं प़डता। इस पर न्यायालय में पक्ष-विपक्ष के वकीलों के बीच करीब पौने दो घंटे जोरदार बहस हुई। इसके बाद न्यायालय ने साफ कर दिया कि यही खंडपीठ मुकदमे की सुनवाई करेगी। न्यायालय ने अगली सुनवाई के लिए ८ फरवरी २०१८ की तारीख तय की है। उधर, सुप्रीम कोर्ट ने मामले से जु़डे सभी वकीलों को कहा कि इस मुकदमे से जु़डे सभी दस्तावेजों को पूरा करें ताकि मामले की सुनवाई ना टाली जाए। सबसे पहले शिया वक्फ बोर्ड की तरफ से दलीलें पेश की गईं। शिया बोर्ड के वकील ने विवादित स्थल पर मंदिर बनाए जाने का समर्थन किया। दूसरी तरफ शिया वक्फ बोर्ड की इस दलील का सुन्नी वक्फ बोर्ड ने क़डा विरोध किया। सुन्नी बोर्ड ने कहा कि अभी मामले से जु़डे सारे दस्तावेज पेश नहीं हो पाए हैं। इस पर अडिशनल सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने सुन्नी बोर्ड के दावे का विरोध किया। उन्होंने कहा कि कोर्ट में सारे कागजात जमा हैं। सुन्नी बोर्ड के दूसरे वकील राजीव धवन ने कहा कि अगर मामले की रोज सुनवाई हो तो सुनवाई पूरी होने में एक साल लगेंगे। सुन्नी वक्फ बोर्ड के वकील कपिल सिब्बल ने सुप्रीम कोर्ट से कहा कि इस मामले की जब भी सुनवाई होती है तो कोर्ट के बाहर कानून-व्यवस्था बनाए रखने की चुनौती होती है। उन्होंने कोर्ट से व्यक्तिगत तौर पर अनुरोध किया कि एक बार जब सारी दलीलें पूरी हो जाएं तो इस मामले को १५ जुलाई २०१९ को सुना जाए।19,000 से ज़्यादा पन्नों के दस्तावेज इतने कम समय मे कैसे जमा करवाए गए। अगर ऐसा हुआ भी है तो मामले से जुड़े पक्षों के पास अभी ये दस्तावेज नहीं पहुंचे हैं। यानी अनुवाद किए हुए दस्तावेज की कॉपी नहीं दी गई है। भाजपा प्रवक्ता जीवी एल नरसिम्ह राव ने कहा कि कांग्रेस को यह स्पष्ट करना चाहिए कि कपिल सिब्बल द्वारा व्यक्त विचार उनका अपना था या सुन्नी वक्फ बोर्ड का ? राहुल गांधी पर चुटकी लेते हुए भाजपा प्रवक्ता ने कहा कि क्या स्वयं घोषित शिव भक्त की भगवान राम में आस्था नहीं है। मामले में 8 फरवरी से शुरू होगी सुनवाई।  यही खंडपीठ करेगी सुनवाई।  सुप्रीम कोर्ट ने मामले से जुड़े सभी वकीलों (ऐडवोकेट ऑन रिकार्ड ) को कहा कि मामले से जुड़े सभी दस्तावेजों को पूरा करें ताकि मामले की सुनवाई ना टाली जाए।

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