एम्स के डॉक्टरों का कहना है कि बच्चों में होने वाले ७५ से ९० प्रतिशत कैंसर समय रहते इलाज करने पर ठीक हो सकते हैं, लेकिन जागरूकता के अभाव और देर से मर्ज पक़ड में आने के बाद यह बीमारी तेजी से फैल जाती है। एम्स के पीडियाट्रिक्स विभाग की डॉ. रचना सेठ के मुताबिक, अक्सर अभिभावकों को कैंसर के लक्षण ब़डी देर से समझ में आते हैं। इस कारण कैंसर ट्यूमर बनकर जानलेवा हो जाता है। उन्होंने कहा कि कैंसर के बारे में लोगों को जागरूक करने की आवश्यकता है। उन्हें यह बताना जरूरी है कि कैंसर बचपन की अवस्था में भी हो सकता है। यदि जल्द यह प़कड में आ जाए तो कई किस्म के गंभीर कैंसरों का इलाज हो सकता है। सेठ के मुताबिक हर साल ५० हजार बच्चों में कैंसर डायग्नोज होता है और एम्स में हर साल ३०० से ३५० बच्चों का इलाज होता है।द्भष्ठ ब्स्र ध्ूय्ह्लय्विशेषज्ञों के मुताबिक, तेज और लगातार बुखार, वजन में कमी, कूब़ड निकलना, शरीर के किसी भी अंग में दर्द होना या गांठ बनने को कभी नजरंदाज नहीं करना चाहिए। एक कैंसर संस्थान के डॉक्टर के अनुसार बच्चों में सामान्यत: एक्यूट लिंफोब्लास्टिक ल्यूकेमिया या ब्लड कैंसर, ब्रेन ट्यूमर, किडनी का कैंसर और रेटिनोब्लास्टोमा या आंखों का ट्यूमर आदि होते हैं।

Facebook Comments

LEAVE A REPLY