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चेन्नई। केरल के प्रसिद्ध सबरीमाला मंदिर में महिलाओं के प्रवेश को लेकर विवाद जारी है। इस बीच प्रसिद्ध अभिनेता रजनीकांत ने भी मंदिर मामले पर ​अपने विचार प्रकट किए हैं। रजनीकांत अपनी आगामी फिल्म ‘पेट्टा’ की शूटिंग से लौटे थे। उस समय उनसे सबरीमाला मंदिर मामले पर पूछा गया। प्रसिद्ध अभिनेता ने विभिन्न क्षेत्रों में महिलाओं को बराबरी का दर्जा देने की बात कही है। साथ ही मंदिर जैसे स्थानों की प्राचीन परंपराओं का समर्थन भी किया है।

रजनीकांत ने कहा है कि मंदिर की जिस परंपरा का लंबे समय से पालन किया जाता रहा है, उसमें हस्तक्षेप नहीं करना चाहिए। उच्चतम न्यायालय के फैसले के बाद सबरीमाला मंदिर में महिलाओं के प्रवेश पर काफी विवाद हो रहा है। इस पर रजनीकांत ने पहली बार प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा है कि महिलाओं के लिए हर क्षेत्र में समानता का कोई दूसरा विकल्प नहीं है।

उन्होंने कहा, जब आप एक मंदिर के बारे में बात करते हैं, तो हर मंदिर की कुछ सम्मानित परंपराएं रही हैं, जिनका वर्षों से पालन होता रहा है। रजनीकांत ने कहा कि उनका विनम्र विचार है कि किसी को भी इनमें हस्तक्षेप नहीं करना चाहिए।

दूसरी ओर मी टू अभियान पर, जिसके तहत कई महिलाओं ने जानेमाने लोगों पर गंभीर किस्म के आरोप लगाए हैं, रजनीकांत ने कहा है कि यह महिलाओं के लिए लाभदायक है। हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि इसका दुरुपयोग नहीं होना चाहिए और सही तरीके से ही इस्तेमाल करना चाहिए।

गौरतलब है कि केरल के सबरीमाला मंदिर में महिलाओं के प्रवेश के मामले में उच्चतम न्यायालय ने 28 सितंबर को ऐतिहासिक फैसला सुनाया था। न्यायालय ने कहा था कि सबरीमाला मंदिर में हर आयु की महिला को प्रवेश दिया जाए। इससे पहले मंदिर में प्रचलित एक प्राचीन परंपरा के अनुसार यहां 10 से 50 साल की महिलाओं का प्रवेश वर्जित था। कुछ लोग अब भी महिलाओं के प्रवेश का विरोध कर रहे हैं। उनका तर्क है कि भगवान अयप्पा ब्रह्मचारी हैं। लिहाजा मंदिर में प्रचलित रही परंपरा को आगे भी जारी रखा जाए।

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